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शेर मोहम्मद की वीरता पर गांव को गर्व, दुआ के लिए उठे हाथ

Tue, 25 Apr 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो / बुलंदशहर
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गुलावठी के ग्राम आसिफाबाद चन्द्रपुरा निवासी सीआरपीएफ जवान शेर मोहम्मद की बहादुरी पर घरवालों को ही नहीं पूरे गांव को गर्व है। मंगलवार को शेर मोहम्मद के घर पर ग्रामीणों का तांता लगा रहा। हर कोई उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछ रहा था।
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शेर मोहम्मद सुकमा (छत्तीसगढ़) में सीआरपीएफ जवानों पर नक्सलियों के हमले के बाद उनसे लोहा लेते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका इलाज वहीं सैनिक अस्पताल में चल रहा है। इस हमले में 25 जवान शहीद हो गए थे।

शेर मोहम्मद की मां फरीदन बेगम ने गर्व से कहा कि मेरे बेटे ने जो बहादुरी दिखाई है उससे मेरा ही नहीं पूरे गांव का सीना चौड़ा हो गया है। घायल बेटे की याद करते हुए फरीदन की आंखों में बार-बार आंसू भर आये। वह अपने बेटे के साहस भरे कार्य पर खुश भी हैं। फरीदन का कहना है कि उसके बेटे ने पांच नक्सली मार गिराए।
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जब वह एक सीआरपीएफ जवान को कंधे पर लादकर जा रहा था तो नक्सलियों ने उसे कई गोलियां मारी जिससे वह खाई में गिर पड़ा। फरीदन कहती है कि बेटे से उसकी फोन पर बात हुई है। उसने वादा किया है कि जल्द ठीक होकर गांव आऊंगा। शेर मोहम्मद के पिता स्व: नूर मोहम्मद भी फौज में थे।

जब शेर मोहम्मद छोटा था तो कहता था कि मैं फौजी बनूंगा। परिजन एवं ग्रामीण शेर मोहम्मद के जल्द स्वस्थ होने की दुआयें करते रहे। शेर मोहम्मद के भतीजे शाहनवाज ने कहा कि उसने संकल्प लिया है कि वह फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा।

उधर, शेर मोहम्मद की बहन मुननी, चचेरे भाई हकीकत चौहान, इस्तार अली चौहान, सगीर खान शकील आदि ने शेर मोहम्मद की बहादुरी की तारीफ की। ग्रामीणों ने सुकमा में नक्सली मुठभेड़ में मारे गए सैनिकों की मौत पर दुख जताया।

पीएम से कुछ नहीं मांगेंगी 
शेर मोहम्मद की मां फरीदन से जब पूछा गया कि आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शेर मोहम्मद के लिए क्या मांग करेंगी। जवाब में उन्होंने कहा कि बहादुरी की कोई कीमत नहीं होती। शेर मोहम्मद ने अपने कर्तव्य का पालन किया है। प्रधानमंत्री से वह कुछ नहीं मांगेंगी। प्रधानमंत्री स्वयं जानते हैं कि क्या करना है।

जिन्दाबाद के नारे गूंजे
शेर मोहम्मद के घर के बाहर एकत्र ग्रामीणों ने शेर मोहम्मद जिन्दाबाद के नारे लगाये। ग्रामीणों का एक नारा यह भी था कि शेर मोहम्मद चन्द्रपुरा का शेर है। ग्रामीण का जोश यह था कि नौजवानों को सेना में भर्ती करो, के नारे भी लगा रहे थे। ग्रामीणों को शेर मोहम्मद के अस्पताल से आने का इंतजार है।

कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा
शेर मोहम्मद की बहादुरी की दाद देने तथा परिजनों से सहानुभूति व्यक्त करने के लिए शासन का कोई अधिकारी समाचार भेजे जाने तक ग्राम चन्द्रपुरा नहीं पहुंचा। जबकि आसपास के गांव के लोगों का तांता लगा हुआ था।

देश की सुरक्षा सर्वोपरि : गुलिस्ता
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों को नाकों चने चबाने वाले सीआरपीएफ के बहादुर जवान गुलावठी के ग्राम आसिफाबाद चंद्रपुरा निवासी शेर मोहम्मद की पत्नी गुलिस्ता को अपने पति की बहादुरी पर नाज है। गुलिस्ता का कहना है कि उनके पति देश की रक्षा के लिए ही सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।

गुलिस्ता के अनुसार नक्सलियों और आतंकवाद से लड़ना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यह पूछे जाने पर क्या आप अपने बेटे को भी बड़ा होने पर सेना में भेजेंगी, गुलिस्ता ने कहा, हां। मुझे खुशी होगी कि मेरा बेटा देश की रक्षा का दायित्व संभालें। गुलिस्ता का मासूम बेटा सुहैल अभी मात्र तीन वर्ष का है। सुकमा की घटना से अंजान मासूम घर में लोगों की आवाजाही देख सहमा सा है।

बुलंदशहर में लंबी है जांबाजों की फेहरिस्त
देश सेवा करने वालों की बुलंदशहर में हमेशा से लंबी कतार रही है। देश की शान के लिए जिंदगी दांव पर लगाने वाले शेर मोहम्मद जैसे कई वीर सपूत बुलंदशहर की धरती पर जन्मे हैं। औरंगाबाद अहीर निवासी परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव अकेले ऐसे पराक्रमी हैं, जिनको जिंदा रहते हुए परमवीर चक्र से नवाजा गया।

योगेंद्र यादव की बहादुरी के किस्से देश में बच्चोें को सुनाए जाते हैं। वहीं, देवराला के शहीद नीरज राघव की शहादत को कोई नहीं भूला पाया है। खुर्जा क्षेत्र के गांव सौदा हबीबपुर के रमेश सोलंकी दुश्मनों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

बिसवाना गांव के शहीद हीरालाल सूडान में शहीद हुए और विदेशी धरती पर देश का झंडा बुलंद किया। कारगिल युद्ध में कुरली के ऋषिपाल सिंह भी वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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