गेहूं खरीद को लेकर बिचौलियों और सरकारी मशीनरी के बीच ‘प्राइसवार’ छिड़ गया है। सरकारी क्रय केंद्रों पर जहां 1525 रुपये क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा जा रहा है। वहीं, मंडियों में गेहूं का रेट 1560 रुपये तक पहुंच चुका है। प्राइसवार नहीं थमा तो गेहूं का रेट 1700 रुपये क्विंटल तक पहुंचने की उम्मीद है।
सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर अब तक 21 हजार मीट्रिक टन अनाज खरीदा जा चुका है। अचानक सरकारी केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो गई है। कई केंद्रों पर तो गेहूं ही नहीं पहुंच रहा है। इसलिए गेहूं खरीद का ग्राफ खिसक रहा है।
अफसरों के मुताबिक अब तक कम से कम 50 हजार एमटी गेहूं खरीद हो जानी चाहिए थी। उधर, बुलंदशहर, गुलावठी, जहांगीराबाद, सिकंदराबाद, डिबाई, अनूपशहर, शिकारपुर आदि मंडियों मेें गेहूं का रेट 1560 रुपये तक पहुंच गया है।
ऐसे में किसानों का रुख क्रय केंद्रों से मुड़कर मंडियों की ओर पहुंच गया है। एक-एक मंडी में रोजाना 25 से 30 ट्रक गेहूं लोड हो रहा है। किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार को गेहूं लेकर सरकारी क्रय केंद्र गए थे। वहां गुणवत्ता बताकर गेहूं लौटा दिया गया। उसी गेहूं के मंडी में 1545 रुपये दाम मिले हैं। जबकि सरकारी केंद्रों पर रेट 1525 रुपये है।
प्लानिंग के तहत हो रही खरीद
इस बार गेहूं का उत्पादन 30-40 प्रतिशत घटा है। इस बात का कारोबारियों को पता है। इसलिए व्यापारी वर्ग आगे की प्लानिंग कर गेहूं खरीद रहा है, जिससे समय आने पर मोटा मुनाफा कमाया जा सके। व्यापारियों के अनुमान के मुताबिक इस बार गेहूं का रेट कम से कम 1700 रुपये क्विंटल पहुंच सकता है।
किसान बेच चुके गेहूं
90 प्रतिशत किसान मंडी या क्रय केंद्रों पर अनाज बेच चुके हैं। इसलिए भविष्य के रेट का फायदा सिर्फ व्यापारियों और बिचौलियों को होने वाला है।
अनाज मंडियों में गेहूं का रेट 1550-1560 रुपये पहुंच गया है। इससे सरकारी केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो गई है। - वीके विदवा, जिला विपणन अधिकारी