प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर खरा नहीं उतरने के कारण 51 पॉटरियों के बंद होने से हजारों मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पॉटरियां पर ताले लटकने से अब मजदूर भी पलायन को मजबूर हो जाएंगे।
दूसरी ओर मजदूरों की कमाई से गुलजार रहने वाला पॉटरी सेंटर बाजार पर भी संकट खड़ा हो गया है। मुनाफा कमाने वाले व्यापारियों को भी रोजी रोटी की चिंता सताने लगी है।
वहीं, ब्याज पर उधार लेने वाले तमाम मजदूरों को रोजी रोटी बंद होने से उधार चुकाने की चिंता सता रही है। प्रदूषण फैलाने और एनजीटी के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर अब तक 51 फैक्ट्रियों पर तालाबंदी कर दी गई है।
इससे पॉटरियों में कार्यरत मजदूर सड़कों पर आ गए हैं। बिहार से आए मजदूर रामकिशन, शेषमणि, जग्गन ने बताया कि जब से सीलबंदी की कार्रवाई शुरू हुई है, वे बेरोजगार हो गए हैं। परिवार दो जून की रोटी को मोहताज है।
मजदूरों दूसरे स्थान पर भी काम नहीं मिल रहा है। अगर जल्द ही पॉटरियां चालू नहीं हुई तो अधिकांश परिवार बिहार और बंगाल अपने घरों को पलायन करने को मजबूर होंगे।
पॉटरी सेंटर मार्केट में छाई मायूसी
पॉटरी में काम करने वाले मजदूरों से नगर का पॉटरी सेंटर बाजार गुलजार रहता था। फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू होने से बाजार में मायूसी छा गई है। मजदूरों पर संकट से व्यापारियों के भी हाथ-पैर भी फूल गए हैं। व्यवसायियों पे बताया कि अगर मजदूर चले गए तो उनका व्यापार चौपट हो जाएगा।
मजदूरों के पलायन का उद्यमियों में भय
पॉटरी फैक्ट्रियां बंद होने से हजारों मजदूर कमाई के लिए पंजाब, गुजरात आदि राज्यों में जाने की तैयारी में जुट गए हैं। दस्तावेज जमा कराने के बाद पॉटरियां शुरू हुई तो उनके सामने मजदूरों का संकट खड़ा हो जाएगा।
उद्यमी पियूष शर्मा ने बताया कि सभी मानक पूरे करने के बाद उम्मीद है 15-20 दिनों में सीलबंद पाटरियाें को शुरू करने का आदेश मिल जाए। मजदूर अगर दूसरी जगह चले गए तो काम शुरू करने में काफी समस्याएं होंगी।