बीबीनगर डबल मर्डर मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी। फाइल फोटो
बुलंदशहर। बीबीनगर के बहांपुर गांव में एक फरवरी 2018 को की गई शिवानी (20) और शीलू (22) की हत्या के मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट में पुलिस की कहानी पूरी तरह से बदल गई। पुलिस ने गांव के ही युवक पुष्कल उर्फ अंकित को ही आरोपी बनाकर सच्चाई को छिपा लिया था। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम शहजाद अली ने उसे हत्या नहीं, बल्कि हत्या के लिए उकसाने का दोषी मानते हुए 14 साल कारावास की सजा सुनाई है और 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड लगाया है। शिवानी के पिता गजेंद्र और भाई राहुल को हत्या का आरोपी माना गया है। दोनों पर हत्या और पुलिसकर्मियों व गवाहों पर साक्ष्य छिपाने का केस चलेगा। अगली सुनवाई तीन मई को होगी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केशव देव शर्मा ने बताया कि शीलू गजेंद्र के साले की बेटी थी। 88 पन्नों के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि इस केस में पुलिस और गवाहों ने सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयास किया और साक्ष्यों को छिपा लिया। दोनों युवतियों की हत्या की रिपोर्ट गजेंद्र ने अज्ञात में दर्ज कराई थी। पुलिस ने अंकित को गिरफ्तार कर दावा किया था कि दोनों की हत्या उसने ही की हैं। उसके खिलाफ ही आरोप पत्र दाखिल हुआ।
पुलिस का कहना था कि वारदात के वक्त शिवानी के परिजन घर में मौजूद ही नहीं थे, जबकि सुनवाई के दौरान उनकी मौजूदगी के साक्ष्य मिले। कोर्ट में साबित हुआ कि अंकित मौके पर मौजूद था। उसने ऐसी बातें कीं जिनसे गुस्से में आकर गजेंद्र और राहुल ने शीलू और शिवानी की हत्या की। अंकित को दोनों की हत्या के मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए अलग-अलग सात-सात साल की सजा सुनाई गई है। एक सजा पूरी होने के बाद दूसरी चलेगी।
जली अवस्था में मिले थे दोनों के शव
शिवानी और शीलू के शव घर के अंदर की जली अवस्था में मिले थे। दोनों का पहले गला घोंटा गया था। इसके बाद शवों को जलाया गया था। गजेंद्र सिंह ने एफआईआर में बताया था कि राहुल का रिश्ता तय हो चुका था। वे लोग शादी के कार्ट बांटने गए थे। घर पर शिवानी और शीलू ही थीं। कोई उनकी हत्या करके भाग गया। पुलिस ने जांच के बाद अंकित को गिरफ्तार किया था। दावा किया गया था कि उसने ही दोनों की हत्या की। दोनों युवतियों ने परिजनों ने पुलिस की कहानी पर संतोष जाहिर किया था। हालांकि, तब भी विवेचना पर सवाल उठ रहे थे। पुलिस यह नहीं बता पाई थी कि अगर अंकित ने दोनों की हत्या की तो एक की जान लेते वक्त दूसरी चिल्लाई या भागी क्यों नहीं।
सच्चाई छिपाकर हत्या के आरोपी पिता-पुत्र का दिया साथ
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी बीबीनगर मुकेश कुमार और निरीक्षक क्राइम ब्रांच उदयवीर सिंह बालियान ने विवेचना के दौरान सही तथ्यों को छिपाया और झूठे तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया। असली मुल्जिमों को बचाया और साक्ष्यों को भी खुर्द-बुर्द कर दिया। गवाह जोगेंद्र उर्फ जुगिया आरोपी गजेंद्र का करीबी है और हरदन सिंह व अजयवीर सिंह गजेंद्र के रिश्तेदार हैं। उन्होंने भी सही साक्ष्य छिपाते हुए अपने बयान अंकित कराए हैं। तत्कालीन फील्ड यूनिट प्रभारी सुरेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक राजबहादुर राठी पर मामले की विवेचना में साक्ष्य छिपाने वाले विवेचक व हत्या के आरोपी पाए गए पिता-पुत्र का साथ देने का आरोप है।