पुरानी हो चली नगर कोतवाली की बिल्डिंग गिरने के कगार पर है। पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। थाना कोतवाली समेत दफ्तरों में फर्नीचर की कमी है। आंकिक विभाग की लापरवाही के चलते दफ्तरों के रख-रखाव, फर्नीचर और चुनाव संबंधी खर्च के लिए आए एक करोड़ रुपये वापस चले गए।
तत्कालीन एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी ने जांच शुरू कर दी है। एक साल से नगर कोतवाली की बिल्डिंग जमीन में धंसती जा रही है। दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। हवालात की दीवार जमीन में धंस गई है। जानकार बताते हैं कि बिल्डिंग के नीचे जमीन में पानी जा रहा है।
जिसके चलते ऐसा हो रहा है। चार माह पहले विशेषज्ञों ने बिल्डिंग खाली करने के लिए कहा था। जिसके बाद कोतवाली को कुछ सुरक्षित कमरों में शिफ्ट कर दिया था। जगह की तंगी के चलते जान जोखिम में डालकर एक बार फिर पहले की तरह उसी बिल्डिंग में काम हो रहा है।
अफसरों ने उस समय रख-रखाव और मरम्मत के बजट के नाम पर हाथ खड़े कर दिए थे। आंकिक विभाग के बाबुओं की लापरवाही के चलते दफ्तरों, थाना-कोतवालियों के रख-रखाव, मरम्मत समेत कई मदों में करीब एक करोड़ रुपया रखा का रखा रह गया।
वर्ष 2016-17 का जब साल बीता तो बाबुओं ने तत्कालीन एसएसपी सोनिया सिंह के सामने फाइल को रखा। रुपया शासन को वापस जाता देख एसएसपी बाबुओं पर बिफर गईं। बाबुओं से स्पष्टीकरण मांगा तो कोई जवाब नहीं बना।
उनकी बोलती बंद हो गई। बाबुओं की लापरवाही मानते हुए एसएसपी ने जांच बैठा दी। तत्कालीन एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने जांच शुरू कर दी है।