अनूपशहर। अहार थाना क्षेत्र के गांव पोटा बादशाहपुर में करीब 19 वर्ष पूर्व वर्ष 2006 में गन्ना क्रय केंद्र से लोहे के बाट चोरी करने वाले आरोपी को अनूपशहर सिविल जज जूनियर डिवीजन मयंक कुमार के न्यायालय ने दोषी करार दिया है। न्यायालय में दोषी वृद्ध ने कहा कि साहब.. मैं बूढ़ा हो चुका हूं, उस दौरान चोरी किए गए माल की कीमत बहुत कम थी। इसके बाद न्यायालय ने उन्हें जेल में बिताई गई 12 दिन अवधि की सजा और दो हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई।
वादी मुकदमा मुनेश कुमार ने पांच जनवरी 2006 को अहार थाने पर तहरीर दी। जिसमें उन्होंने बताया कि वह गांव पोटा बादशाहपुर स्थित गन्ना क्रय केंद्र पर पर चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि चार जनवरी की रात गांव निवासी आरोपी राजेंद्र सिंह और दो अन्य व्यक्ति 50-50 किलो के चार बाट चोरी कर ले गए। आरोपियों के डर के कारण वह कुछ नहीं बोल सके।
मामले में अहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी राजेंद्र को जेल भेज दिया और 20 दिन में ही आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। जिस पर अब न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को अवलोकन करते हुए राजेंद्र को दोषी करार दिया है। वहीं, कोर्ट में सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान 75 वर्षीय आरोपी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि वह बूढ़ा है और चोरी किए गए सामान की कीमत बहुत कम है। न्यायालय ने पाया कि चोरी किए गए वाट का कुल वजन 200 किलो था। घटना के समय लोहे की कीमत अधिकतम 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भी चोरी का माल 4 हजार रुपये से अधिक का नहीं था। आरोपी पहले ही 14 जनवरी से 25 जनवरी 2006 यानि 12 दिन तक जिला कारागार में रह चुका था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने राजेंद्र सिंह को आईपीसी की धारा 379 और 411 के तहत कारावास में बिताए 12 दिन और 2 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।