विधानसभा चुनाव-2017 के दंगल में नोटा ने 38 सियासी पहलवानों को चित कर दिया। नोटा से हारे उम्मीदवारों के वोट नोटा से कम निकले। नोटा का बटन उस स्थिति में वोटर दबाते हैं जब उनको किसी भी दल का प्रत्याशी पसंद न हो।
जनपद की विधानसभा सीट सिकंदराबाद, बुलंदशहर, स्याना, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर और खुर्जा में 11567 वोटर्स ने नोटा का बटन दबा 68 प्रत्याशियों को पूरी तरह नकार दिया। सबसे अधिक शिकारपुर में नोटा बटन दबाया गया। सबसे कम सिकंदराबाद में नोटा का इस्तेमाल हुआ।
सिकंदराबाद में 1038 और शिकारपुर में 2115 वोटर्स ने नोटा का बटन दबाया। जनपद की सातोें विधानसभा सीटों पर 38 प्रत्याशी ऐसे थे जिनको नोटा से कम वोट मिले। सिकंदराबाद में नोटा ने 04, बुलंदशहर में 03, स्याना में 08, अनूपशहर में 07, डिबाई में 03, शिकारपुर में 09 और खुर्जा विधानसभा सीट पर 04 प्रत्याशियों को नोटा ने शिकस्त दी।
इन सीटों पर 38 प्रत्याशियों का मत प्रतिशत नोटा से भी कम रहा। नोटा से जिन प्रत्याशियों को शिकस्त हाथ लगी वह छोटे दल या निर्दलीय थे।
गुड्डू और मुकुल उपाध्याय ने छोड़ा मैदान
विधानसभा चुनाव में खुद को हारता देख रालोद के सदर सीट से प्रत्याशी गुडडू पंडित ने दोपहर एक बजे ही मतगणना स्थल छोड़ दिया। बसपा के मुकुल उपाध्याय भी मतगणना को बीच में छोड़कर मतगणना स्थल से बाहर आ गए। जिस समय प्रत्याशी बाहर आ रहे थे, उनके चेहरे पर हताशा और मायूसी साफ झलक रही थी।
विधानसभा चुनाव में 68 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से 38 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम मत मिले। सभी विधानसभा सीटों पर 11567 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर सबको नकार दिया था।
- आंजनेय कुमार सिंह
जिला निर्वाचन अधिकारी