जनपद शुक्रवार से गेहूं की खरीद होनी है। मगर खरीदारी को लेकर मार्केटिंग विभाग के अफसर गंभीर नहीं है। अब तक गेहूं क्रय केंद्रों पर कांटा, बाट, तराजू और बोरी-बारदाने की गांठें नहीं पहुंची हैं।
जनपद में दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल बोई गई थी। कृषि विभाग के मुताबिक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आने से 30 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई थी। बाकी 1.70 लाख हेक्टेयर फसल पूरी तरह सुरक्षित और सेहतमंद हैं।
फसल पककर कमोबेश तैयार हो चुकी है। इसी के चलते जिले में गेहूं खरीद को 90 केंद्र बनाए गए हैं। बता दें कि गेहूं शुक्रवार से खरीदा जाना है। खास बात यह है कि फिलहाल सभी क्रय केंद्र कागजों में ही हैं। ऐसे में शुक्रवार को जो किसान फसल बेचने निकलेंगे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अनाज मंडी में दो केंद्रों पर गेहूं की खरीद होनी है। दोनों केंद्रों पर कांटा, बाट, तराजू और बोरी-बारदाने का इंतजाम नहीं किया गया है। नियम के मुताबिक क्रय केंद्र पर भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन और समर्थन मूल्य लिखा होना चाहिए।
जेवर में 17 केंद्रों पर होगी खरीदः जेवर। तहसील में 17 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें जेवर, रबूपुरा और जहांगीरपुर में दो-दो केंद्रों के अलावा तिरथली, जहांगीरपुर, नीमका, रामनेर, थोरा, चौरोली, चांचली, रन्हेरा, जौनचाना, रौनीजा और ढुंढेरा में केंद्र बने हैं।