सरकार की मंशा पांच साल में किसानों की आय भले ही दोगुना करने की हो, लेकिन सरकार की ओर से दैवीय आपदा से फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए भेजी गई धनराशि किसानों तक नहीं पहुंचाई गई।
दरअसल, समस्त उपजिलाधिकारियों को किसानों के एकाउंट में धनराशि ट्रांसफर करना था। खास बात यह है कि सरकारी मुलाजिम किसानों का एकाउंट नंबर नहीं जुटा पाए। ऐसे में साहब को 36 में से 29 करोड़ रुपये शासन को वापस लौटाने पड़े।
तीन साल पहले चक्रवाती तूफान, ओलावृष्टि और बारिश से जिले में चार लाख किसानों को 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। 1.80 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल लगभग पूरी तरह तबाह हो गई थी।
आपदा राहत के तहत केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को 89 करोड़ रुपये बांटे गए। दिसंबर माह में शासन ने किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए 36 करोड़ रुपये ओर भेजे थे। 36 करोड़ रुपये किसानों के बैंक एकाउंट नंबर में ट्रांसफर करने थे।
इसके लिए किसानों के बैंक एकाउंट नंबर की जरूर थी। जिन किसानों का बैंक एकाउंट नंबर उपलब्ध हो पाए, उनके एकाउंटस में करीब सात करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। एकाउंट नंबर नहीं होने की स्थिति में शेष 29 करोड़ की रकम शासन को लौटा दी गई।
दैवीय आपदा के समय 18 हजार प्रति हेक्टेयर के हिसाब से किसानों के नुकसान की भरपाई की गई थी। अफसरों ने 89 करोड़ रुपये का वितरण इसी फार्मूले से किया था। बाद में क्षतिपूर्ति का नियम बदल दिया गया। नए नियम के तहत किसानों को 2200 रुपये के हिसाब से भरपाई की गई।
भरपाई से वंचित रह गए किसान ः शासन को 29 करोड़ रुपये वापस होने से जिले में काफी किसानों तक नुकसान की रकम नहीं पहुंच सकी। किसान, सुदेश, रामपाल कृष्णपाल आदि ने बताया उनका बैंक एकाउंट नंबर लेने कोई नहीं आया और न ही उनको नुकसान की भरपाई की गई।