विधानसभा तक पहुंचने के लिए प्रत्याशियों की राह गांव के प्रधान आसान बनाएंगे। चुनाव में प्रधानों की अहमियत को देखते हुए प्रत्याशियों ने उन्हें साधना शुरू कर दिया है।
जिले में 951 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 1993 बूथ बनाए गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में महज 568 बूथ हैं।
जिले में करीब 24 लाख 93 हजार मतदाता हैं। इसमें से करीब 70 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र से और 30 फीसदी वोटर शहरी क्षेत्र के हैं। ग्रामीण वोटरों को साधने में ग्राम प्रधान की अहम भूमिका होती है। ग्रामीण वोटरों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए प्रत्याशियों को प्रधानों की परिक्रमा करनी पड़ेगी।
अभी से ही प्रत्याशियों ने प्रधानों को रिझाना शुरू कर दिया है। प्रधानों के अलावा बीडीसी सदस्य और जिल पंचायत सदस्यों को भी प्रत्याशियों की निगाह है।
चौपाल से लेकर वोट डलवाने तक की जिम्मेदारी
प्रधानों को विधानसभा चुनाव के लिए चौपाल से लेकर मतदान के दिन वोट दिलाने तक की जिम्मेदारी दी जाती है। भाजपा-बसपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं। यह प्रत्याशी हर गांव में प्रधानों को साधने में जुटे हैं। वहीं, हर प्रत्याशी गांव में मतदाताओं को देखते हुए बजट तय कर रहा है।
इन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए चुनावी चौपाल पर आने वाले खर्च को भी प्रत्याशी प्रधानों को दे रहे हैं। प्रत्याशी के गांव पहुंचने पर होने वाली चौपाल में नाश्ता-पानी में आने वाला बजट भी प्रधानों को दिया जा रहा है।