बुलंदशहर/अनूपशहर/सिकंदराबाद/खुर्जा। माह-ए-रमजान के दूसरे दिन बुधवार को भी अकीदतमंदों ने रोजा रखा। रोजा रखने वालों में बड़ों के साथ बच्चे भी उत्साह के साथ शामिल हो रहे हैं। नगर से लेकर देहात तक की प्रमुख मस्जिदों में तरावीह की सदाएं गूंज रही हैं। मंगलवार रात रोजा रखने वालों ने तरावीह पढ़ी और अल्लाह की इबादत कर गुनाहों के लिए माफी मांगी।
सिकंदराबाद के मौलाना मोहम्मद आरिफ और अनूपशहर स्थित जामा मस्जिद के शहर इमाम मोहम्मद इस्माइल कासमी ने बताया कि सहरी खाकर हर रोजेदार अल्लाह का मेहमान बन गया जो पूरे एक माह तक रहेगा। पूरे दिन रोजा रखने के बाद शाम होते ही मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ जुटने लगी। मगरिब की आजान होते ही लोगों ने रोजा खोला। इसमें बड़ों के साथ बच्चे भी शामिल रहे। वहीं नमाज अदा की और अल्लाह की बारगाह में सिर झुक गए। गुनाहों की माफी मांगी। ईशा की नमाज के बाद तरावीह पढ़ने के लिए लोगों की भीड़ मस्जिदों में रुकी रही।
लोगों ने नमाज अदा की। वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम इलाकों में देर रात तक चहल-पहल देखी गई। हर तरह की दुकानें खुली रहीं। उन्होंने बताया कि रमजान अपने दामन में रहमत, मगफिरत और निजात की सौगात लेकर आता है। इस महीने में अल्लाहताला अपने बंदों का इम्तेहान लेता है। एक महीने का रोजा पोख्ता इमानी की दलील है। इस महीने में कुरआन नाजिल हुआ इसलिए इसकी तिलावत भी कसरत से करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि रमजान के महीने को तीन भागों में बांटा गया है। रमजान के पहले दस दिन अल्लाह की खास इबादत के होते हैं। पहले दस में इबादत करने से अल्लाह खुश होकर बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं। अगले दस दिन मगफिरत और आखिरी दस दिन दोजक से आजादी के होते हैं। रमजान में बंदों पर अल्लाह की रहमत बारिश की तरह बरसती है। अल्लाह जरा-जरा से बहाने पर अपने बंदे पर रहमत नाजिल फरमाते हैं।