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बिना आदेशों के मकान तोड़ने में घायल हुए व्यक्ति की मौत

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बिना आदेशों के मकान तोड़ने में घायल हुए व्यक्ति की मौत
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बुलंदशहर। नगर के आवास विकास द्वितीय में अवैध रूप से मकान तोड़ने के दौरान घायल व्यक्ति ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अब मामले में पीड़ित के रिश्तेदार की शिकायत के आधार पर नगर पालिका के ठेकेदार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद वह मौके से फरार हो गए।
दो मई को नगर पालिका ठेकेदार मोहित चौधरी अपने साथी हरीश चौधरी व अन्य के साथ आवास विकास द्वितीय में जेसीबी लेकर मकान तोड़ने के लिए गया था। कालोनी निवासी गोपाल ने आरोप लगाया कि जिस समय ठेकेदार जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचा उस समय लोग घरों में ही मौजूद थे। आरोपी ने लोगों को इतना समय भी नहीं दिया कि वह घरों से बाहर आ सकें। आरोपी ने जेसीबी के माध्यम से घरों को तोड़ दिया, जिसमें रोहताश, नरेश व सुमित को चोटें आईं थी। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो आरोपी ठेकेदार ने उन्हें जेल भिजवाने और ध्वस्तीकरण के लिए नगर पालिका ईओ का आदेश होने की बात कही। लोगों का आरोप है कि आरोपी ने जबरन मकानों को ध्वस्त करते हुए उनका सामान भी बर्बाद कर दिया। मकान तोड़ने के दौरान घायलों को लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। उपचार के दौरान शुक्रवार शाम को घायल रोहताश की मौत हो गई। जिसके बाद कोतवाली देहात पुलिस ने मामले में हरीश व मोहित चौधरी को नामजद करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
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हाईकोर्ट से स्टे के बाद भी तोड़े गए मकान
प्रकरण में अधिवक्ता जितेंद्र कुमार लोधी ने बताया कि उक्त जमीन पर 1984 से यह लोग लगातार रह रहे हैं। 1982 में आवास विकास ने इस जमीन का अधिग्रहण करने का प्रयास किया था। जिसके खिलाफ लोअर कोर्ट में अपील दायर की थी। इसी दौरान आवास विकास द्वितीय बनाने के बाद नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया, लेकिन उक्त जमीन को हैंडओवर नहीं किया गया था। जबकि लोअर कोर्ट से लोगों के पक्ष में फैसला आने पर आवास विकास ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लोगों की रिट पर हाईकोर्ट ने मामले में स्टे आदेश जारी कर दिया था। ऐसे में अधिवक्ता जितेंद्र लोधी ने कहा कि नगर पालिका को ध्वस्तीकरण का अधिकार ही नहीं है, क्योंकि दस्तावेजों में यह जमीन अभी भी टांडा गांव के नाम ही दर्ज है और न तो इसे आवास विकास को हैंडओवर किया गया और न ही नगर पालिका को।
बिना नगर पालिका अधिकारी और पुलिस के हुआ था ध्वस्तीकरण
पीड़ित गोपाल ने बताया कि जिस समय आरोपी ठेकेदार मोहित चौधरी जेसीबी लेकर मकान तोड़ने पहुंचा था, उस समय न तो आरोपी ने नगर पालिका या किसी अन्य विभाग का नोटिस दिखाया और न ही नगर पालिका के अधिकारी उसके साथ थे। ध्वस्तीकरण से पहले पुलिस को भी साथ लिया जाता है, लेकिन उस दौरान पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद नहीं थे।
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मामले में पीड़ित की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। आगे की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। - सुरेंद्र नाथ तिवारी, एसपी सिटी
मामले में नगर पालिका अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है कि आखिर किस आधार पर मकान तोड़ने के निर्देश दिए गए थे। यदि निर्देश दिए गए थे तो अधिकारी और पुलिस मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे। जवाब मिलने और मामले की जांच के आधार पर ही कुछ कहा जा सकेगा। - चंद्रप्रकाश सिंह, डीएम
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