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ईश्वर को प्रसन्न करना ही एकमात्र लक्ष्य बनाएं : कपिल

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अनूपाहर में भागवत कथा सुनती महिला भक्त। संवाद
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अनूपशहर। नगर के परशुराम धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा व्यास कपिल भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य का जीवन अत्यंत संक्षिप्त है। इस छोटे से जीवन में ईश्वर को प्रसन्न करना ही एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।
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कथा के दौरान जब राजा परीक्षित ने शुकदेव महाराज से पूछा कि मृत्यु के निकट खड़े व्यक्ति के लिए क्या उपाय है, तब शुकदेव ने जीवन को सफल बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण नियम बताए। बताया कि जितासन से सबसे पहले अपने आसन को जीतें, यानी शरीर में स्थिरता लाएं। जितश्वास के मध्यम प्राणायाम के जरिए अपनी सांसों पर नियंत्रण करना सीखें।
जितसंग से अपनी संगति सुधारें। हमेशा संत और सकारात्मक लोगों के सानिध्य में रहें। इसी तरह जितेंद्रिय से अपनी दसों इंद्रियों को वश में रखें। इंद्रियों पर नियंत्रण के बिना भक्ति अधूरी है। कथा के दौरान ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के सृजन का प्रसंग सुनाया। इसके बाद भगवान वराह के अवतार की कथा से अधर्म के नाश का संदेश दिया। विदुर-मैत्रेय संवाद, कपिलोपाख्यान और सती चरित्र के माध्यम से पारिवारिक मर्यादाओं का महत्व समझाया गया। कथा के समापन पर भव्य आरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। संवाद
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