फंड की कमी से गंगा किनारे 30 गांवों में शौचालयों का निर्माण रुक गया है। दिलचस्प बात यह है कि प्रशासन ने खुले में शौच के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा किनारे 30 गांवों को चिंहित किया गया है।
खुले में शौच से मुक्ति के लिए संबंधित गांवों में 11,458 शौचालयों का निर्माण होना था। दरअसल, इस गांवों में शौचालय नहीं होने के कारण ग्रामीण गंगा किनारे खुले में शौच को जाते हैं। इससे गंगा में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है।
शौचालय निर्माण के लिए गत् वित्त वर्ष 2.44 करोड़ रुपये जारी किए थे। 2.44 करोड़ रुपये खर्च कर 2033 शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है। बाकी 9425 परिवार अभी भी शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। बिन फंड प्रशासन का अभियान भी बेअसर साबित हो रहा है। हालांकि सीडीओ जसजीत कौर ने कहा है कि शौचालयोें के लिए शासन से जल्द ही धनराशि मिलने की उम्मीद है।
इन गांवों में बनने हैं शौचालय
अहार बांगर, अबरपुर उर्फ बच्चीखेड़ा, आजमपुर उर्फ तौरई बांगर, फतहपुर, हसनपुर बांगर, मौहम्मदपुर बांगर, मुबारिकपुर बांगर, शेरपुर बांगर, सिरोरा बांगर, बदरपुर, भोपतपुर, बिलौना चाप बांगर, ढक नगला, गोकुलपुर खादर, करनवास बांगर, मौहम्मदाबाद उर्फ भेरिया हरद्वारपुर, नौदई बांगर, निवाड़ी बांगर, निवाड़ी खादर, राजघाट बांगर, महाराजपुर , तलवार, उदयगढ़ी बांगर, रवानी कटीरी, औरंगाबाद ताहरपुर, बसी बांगर, चांसी, फरीदाबांगर, मवई ,रामघाट बांगर में 11458 शौचालयों का निर्माण कराया जाना है।
अब 2650 रुपये में बनेगा शौचालय
अब महज 2,650 रुपये खर्च कर आप खुले में शौच से मुक्ति पा सकते हैं। इसके लिए प्रशासन नई और किफायती तकनीक अपनाने की तैयारी में है। एडीएम प्रशासन अरविंद कुमार मिश्र ने बताया कि गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को सस्ते शौचालय फायदे गिनाए जाएंगे।
ताकि ग्रामीण खुद के खर्च पर शौचालय की व्यवस्था करा सके। बता दें कि सस्ते शौचालय के निर्माण से ग्रामीण महंगी खाद भी तैयार कर पाएंगे।
फिलहाल फंड के अभाव में गंगा किनारे 30 गांवों में शौचालयों का निर्माण बंद है। हालांकि, शासन से इस मद में पैसा आना है।
- जसजीत कौर, सीडीओ