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सुविधा का अभाव : सरकारी में कम, निजी में अधिक हो रहे प्रसव

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जिला महिला अस्पताल का भवन। संवाद
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चेतन शर्मा
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बुलंदशहर। जिले के सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और सुविधाएं होने के बाद भी गर्भवती को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। अनूपशहर और लखावटी एफआरयू पर जहां सिजेरियन प्रसव नहीं हो रहे वहीं, सरकारी में दिसंबर माह तक जहां 25,801 प्रसव हुए हैं तो निजी में 44,985 प्रसव हो चुके हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि सरकारी चिकित्सालयों में गर्भवती प्रसव नहीं कराना चाह रहीं, या आशा कार्यकर्ताओं के कमीशन के चक्कर में निजी अस्पतालों में अधिक प्रसव हो रहे हैं।
जिले में जननी सुरक्षा योजना के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण जहां सरकारी चिकित्सालयों में होता है, लेकिन प्रसव के समय सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और स्टाफ की कमी व कुछ आशा कार्यकर्ता भय दिखाकर गर्भवती को निजी अस्पताल ले जाती हैं।
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अप्रैल से दिसंबर माह तक सरकारी चिकित्सालयों में पंजीकरण के मुताबिक 76,842 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला। अभी तक सरकारी चिकित्सालयों पर संस्थागत एवं सिजेरियन 25,801 प्रसव ही हो सके हैं। जबकि निजी अस्पतालों में इस अवधि में सिजेरियन व सामान्य 44,985 प्रसव हुए हैं।
जिले के आठ सरकारी चिकित्सालयों में सिजेरियन और शेष सभी पर संस्थागत प्रसव कराने की सुविधा है। इसके बावजूद उन्हें सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। अनूपशहर ओर लखावटी सीएचसी पर एफआरयू की सुविधा होने के बावजूद सिजेरियन प्रसव के आंकड़े शून्य हैं।

जांच के लिए भटकती हैं गर्भवती
जिले के सरकारी चिकित्सालयों पर गर्भवती को जांच की सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के लिए गर्भवती को सुबह-सुबह सरकारी चिकित्सालय पहुंचना पड़ता है। ऐसे में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। देरी से आने पर अल्ट्रासाउंड व जांच न होने पर गर्भवतियां निजी अस्पताल या लेब पर जाने को विवश होती हैं।

रुपये न मिलने पर रेफर कर देता है स्टाफ
सरकारी चिकित्सालयों में सामान्य व सिजेरियन प्रसव की निशुल्क सुविधा हैं। इसके बावजूद चिकित्सक और स्टाफ गर्भवती के परिजनों से अवैध वसूली करते रहते हैं। मनचाही धनराशि न मिलने पर गर्भवती की हालत गंभीर बता हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में परिजन अस्पताल के बाहर बैठे दलाल के संपर्क में आने पर निजी अस्पताल पहुंच जाते हैं। जिला महिला अस्पताल में भी 24 घंटे दलाल घूमते रहते हैं। जो प्रतिदिन 10 से 15 गर्भवतियों को निजी अस्पताल ले जाने का कार्य कर रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करता है।
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एफआरयू पर प्रसव की संख्या अप्रैल से दिसंबर तक
सेंटर का नाम - सामान्य प्रसव - सिजेरियन प्रसव
जिला महिला चिकित्सालय - 3328 - 547
महिला चिकित्सालय खुर्जा - 2491 - 96
संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद - 1108 - 39
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्याना - 1289 - 50
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डिबाई - 1686 - 08
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनूपशहर - 1109 - 00
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिकारपुर - 1023 - 05
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखावटी - 1247 - 00
कुल प्रसव की संख्या - 13281 - 745

जिले में अप्रैल से दिसंबर माह तक प्रसव पर एक नजर
जिले में संभावित प्रसव की संख्या : 76842
सरकारी चिकित्सालयों पर प्रसव : 25801
निजी चिकित्सालयों में हुए प्रसव : 44985
दिसंबर माह तक हुए कुल प्रसव : 70786
लक्ष्य पूरा करने के लिए जरूरत : 6056

Iजननी सुरक्षा योजना महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर है। सरकारी चिकित्सालयों में सामान्य व सिजेरियन प्रसव के आंकड़े बढ़ाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं। जो आशा कार्यकर्ता सरकारी की जगह निजी अस्पतालों में प्रसव करवा रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिना कारण गर्भवती को रेफर करने वालों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. मंजू अग्रवाल, कार्यवाहक सीएमओI
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