अनूपशहर। उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और पांच बार के विधायक रहे प्रो. किरनपाल सिंह ने अनूपशहर की एमपी-एमएलए कोर्ट में बृहस्पतिवार को समर्पण किया। कोर्ट ने बीते दिनों उन्हें समन जारी कर तलब किया था। अब न्यायालय ने उन पर आरोप तय किए हैं। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई है।
विशेष लोक अभियोजक हितेंद्र वर्मा ने बताया कि 2012 में कोतवाली नगर बुलंदशहर में उप निरीक्षक नरेशपाल सिंह ने पूर्व विधायक प्रोफेसर किरनपाल सिंह के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। उपनिरीक्षक नरेशपाल सिंह ने बताया कि 19 जनवरी 2012 को डीएवी तिराहे के निकट वह टीम के साथ चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र से रालोद-कांग्रेस संयुक्त प्रत्याशी किरनपाल सिंह बिना अनुमति व प्रिंटिंग प्रेस का नाम स्पष्ट किए प्रचार सामग्री ले जा रहे थे। जोकि, आचार संहिता का उल्लंघन था। जिसके बाद विधानसभा प्रत्याशी की प्रचार सामग्री को कब्जे में लेकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में 2013 में हाईकोर्ट ने स्टे का आर्डर दिया था। 2018 में तत्कालीन सीजेएम बुलंदशहर के न्यायालय द्वारा संज्ञान लेकर पुनः कार्रवाई प्रारंभ की गई। अब यह मामला अनूपशहर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित हुआ। एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह चतुर्थ ने पूर्व विधायक प्रो. किरनपाल सिंह को समन जारी करते हुए बीते दिनों तलब किया था। बृहस्पतिवार को किरनपाल सिंह अदालत पहुंचे और आत्मसमर्पण किया। जिसके बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी और आरोप तय किए हैं।