बुलंदशहर कार्यशाला में भाग लेते एसएसपी, पुलिसकर्मी। पुलिस
बुलंदशहर। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन जिला जज संजय सिंह प्रथम ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि अपराधों की सटीक विवेचना और समयबद्ध न्याय दिलाने में वैज्ञानिक साक्ष्य व फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ के निदेशक प्रो. डॉ. आदर्श कुमार ने अपराध स्थल के वैज्ञानिक निरीक्षण, साक्ष्यों के संकलन, उनकी सुरक्षित पैकेजिंग और फॉरेंसिक लैब तक भेजने की बारीकियों पर जानकारी दी। विशेषज्ञ वक्ताओं ने नए कानूनों बीएनएस, बीएनएसएस व बीएसए के तहत साक्ष्यों के सही डॉक्यूमेंटेशन को विवेचना की रीढ़ बताया।
इस दौरान फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पूजा रस्तोगी ने मृत्यु के चिकित्सकीय-विधिक मेडिको-लीगल पहलुओं और श्वासावरोधजन्य मृत्यु के सूक्ष्म परीक्षण पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने कहा कि घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों के सटीक संकलन और प्रस्तुतीकरण से जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी। इससे अदालतों में न्यायिक प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ होगी।
इस अवसर पर एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी राजीव कुमार तृतीय, प्रधान परिवार न्यायाधीश नरेंद्र कुमार पांडेय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असमा सुल्ताना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विकास चौधरी, उप निदेशक डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. उदय प्रताप सिंह और एएसपी क्राइम नरेश कुमार सहित जिले के अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
बुलंदशहर कार्यशाला में भाग लेते एसएसपी, पुलिसकर्मी। पुलिस