गन्ना किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गन्ना बिक्री का पूर्ण भुगतान न होने से किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। मुफलिसी से तंग आकर एक किसान आत्महत्या तक कर चुका है, जबकि एक अन्य किसान ने भी आत्महत्या की कोशिश की थी।
बुलंदशहर और हापुड़ की चीनी मिलें किसानों की बकाया धनराशि 45 करोड़ रुपये पर कुंडली मारकर बैठी हुई हैं। रालोद, भाकियू और किसान सभा ने किसानों को हक दिलाने के लिए मोर्चा खोल दिया है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के यह विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा राजनैतिक मुद्दा बनकर उभर सकता है। ज्ञात हो जिले की चीनी मिल पर करीब आठ करोड़ और हापुड़ की दो मिलों पर 36 करोड़ रुपये बकाया है। किसान भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
भाकियू, रालोद और किसान सभा ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किए हैं, लेकिन राजनैतिक जानकारों का मानना है कि कुछ राजनैतिक दल किसानों के बढ़ते आक्रोश का फायदा उठाकर इस मुद्दे पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की योजना बना रहे हैं।
किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि गन्ने का भुगतान न होने से घर का बजट बिगड़ गया है। मुझे तो साल भर घर का खर्च चलाने के लिए भी कर्ज और लेना पड़ेगा। इसी तरह की बानगी क्षेत्र के अन्य किसानों की भी है।