राजकीय आईटीआई का दीक्षांत समारोह बेहद फीका रहा। वजह, समारोह में न तो अतिथि पहुंचे और न ही छात्र। गिनेचुने छात्रों को सर्टिफिकेट देकर प्राध्यापकों ने कार्यक्रम संपन्न किया।
राजकीय आईटीआई के दीक्षांत समारोह को लेकर एक माह से तैयारियां की जा रही थीं।
प्रधानाचार्य का दावा था कि दीक्षांत समारोह धूमधाम से मनाया जाएगा। करीब 600 स्टूडेंट सर्टिफिकेट लेने पहुंचेंगे। समारोह के लिए रविवार का दिन तय किया गया। दोपहर तक न तो अतिथि पहुंचे और न ही छात्र।
अतिथियों को बार-बार फोन करने के बाद भी जब कोई रास्ता नहीं निकला तो प्राध्यापकों ने समारोह में पहुंचे करीब 100 स्टूडेंट्स को खुद ही सर्टिफिकेट बांट दिए। राजकीय आईटीआई के प्रभारी नोडल अधिकारी और प्रधानाचार्य केडी मिश्रा ने बताया कि दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि डीएम शुभ्रा सक्सेना को आमंत्रित किया था।
वह लखनऊ में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होने के कारण आईटीआई नहीं पहुंच पाईं। बतौर विशिष्ट अतिथि डीआईओएस रामाज्ञा कुमार को आमंत्रित किया गया था लेकिन वह भी नहीं आए।
नकल प्रकरण में रुका है कई स्टूडेंट्स का रिजल्ट
राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य केडी मिश्रा दीक्षांत समारोह में सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या को लेकर में थे। बताया कि विगत वर्ष आईटीआई की परीक्षा में नकल उजागर होने के कारण विद्यार्थियों का रिजल्ट रुका हुआ है।
इसके चलते यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि कितने छात्र पास हुए और कितने फेल। समारोह में करीब 600 बच्चों को सर्टिफिकेट दिए जाने थे लेकिन 100 के आसपास ही स्टूडेंट पहुंचे।