पावर कारपोरेशन के खुर्जा खंड में हुए पेंशन घोटाले में चीफ इंजीनियर के जांच बैठाते ही अफसर हरकत में आ गए हैं। चीफ की फटकार के बाद आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पेंशनरों की पेंशन रोक दी गई है। यह पेंशनर ज्यादा पहुंची पेंशन को नहीं लौटा रहे थे।
खुर्जा खंड में 37 पेंशनर्स को विभागीय बाबू की लापरवाही से ज्यादा पेंशन दी जाती रही। सालों तक ज्यादा पेंशन दिए जाने से विभाग को करीब 75 लाख रुपये की चपत लग गई। जैसे ही फर्जीवाड़ा खुला तो अफसर मामले को दबाने में जुट गए। समाचार पत्रों में फर्जीवाड़ा सुर्खियों में आते ही चीफ इंजीनियर हरकत में आ गए।
उन्होंने अधीक्षण अभियंता को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। चीफ के संज्ञान लेते ही आनन-फानन में पेंशनर्स की रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी गई। 11 पेंशनर्स से करीब 20 लाख रुपये की रिकवरी भी कर ली गई, लेकिन 26 पेंशनर्स ज्यादा पहुंची पेंशन को लौटाने को तैयार नहीं हुए। अब इन पेंशनर्स की पेंशन रोकने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि खुर्जा खंड में बाबू की लापरवाही से करीब 75 लाख रुपये ज्यादा पेंशन जारी कर दी गई। अब पेंशनर्स के सामने दिक्कत है कि वह ऐसे में कैसे पेंशन वापस कर दें।
ज्यादा जारी हुई पेंशन उनसे खर्च हो गई। पेंशनर्स संघ के आरसी द्विवेदी का कहना है कि बाबू की लापरवाही से पेंशनरों पर ज्यादा पेंशन पहुंची। इसमें पेंशनरों का कोई दोष नहीं है। बाबू के वेतन से इसकी रिकवरी की जानी चाहिए। पेंशनर्स अब कहां से पेंशन लाएंगे।