सियासी पिच पर घमासान के बाद शुक्रवार को सपा नेता हरेंद्र यादव का निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तय हो गया है। दरअसल जिन नौ प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान में उतरने के लिए 14 पर्चे खरीदे थे।
उनमें से सपा के उम्मीदवार हरेंद्र यादव के अलावा कोई भी जिला पंचायत सदस्य नामांकन करने नहीं पहुंचा। एक मात्र नॉमिनेशन होने से हरेंद्र के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि इसकी घोषणा जिला निर्वाचन अधिकारी बी चंद्रकला चार जनवरी को शाम चार बजे के बाद करेंगी। शुक्रवार सुबह करीब 11:45 बजे हरेंद्र यादव नामांकन करने के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे।
हरेंद्र ने पत्नी आशा यादव के साथ प्रस्तावक और अनुमोदक की मौजूदगी में जिला निर्वाचन अधिकारी बी चंद्रकला को नामांकन पत्र सौंपा। हरेंद्र यादव ने नामांकन पत्रों के चार सैट एक एक कर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश किए।
हरेंद्र ने नामांकन प्रक्रिया 11:55 से 12:49 बजे तक पूरी की। नामांकन करने के बाद हरेंद्र यादव सपा पदाधिकारी और समर्थकों के साथ वापस लौट आए। जुमे की नमाज के बाद कदीम फडडा को नामांकन करना था।
कदीम नामांकन करने खुर्जा से बुलंदशहर जरुर पहुंचे। लेकिन पार्टी आलाकमान के दबाव और जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर व पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री नरेंद्र भाटी समेत कई स्थानीय नेताओं के प्रबंधन में कदीम ऐसे उलझे कि नियत समय सीमा के बीच नामांकन करने कलक्ट्रेट नहीं पहुंचे। वहीं, मात्र एक नामांकन होने से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर हरेंद्र यादव की ताजपोशी तय हो गई है।
कौन हैं हरेंद्र
हरेंद्र यादव का जन्म सिकंदराबाद के गांव सनौटा में वर्ष 1971 में हुआ था। उनका विवाह आशा यादव से हुई। हरेंद्र ने आर्मी में क्लर्क की नौकरी की।
हालांकि उन्होंने वहां से वीआरएस ले लिया। हरेंद्र की शिक्षा सिकंदराबाद के मोहाना इंटर कालेज में हुई। हरेंद्र यादव पेशे से उद्यमी और समाजसेवी हैं।
पत्नी के बाद अब पति का जिला पंचायत पर राज
पांच साल हरेंद्र यादव की पत्नी आशा यादव का जिला पंचायत परिषद पर राज चला। अब जिले की सबसे बड़ी पंचायत में पांच साल हरेंद्र यादव की तूती बोलेगी।
वर्ष 2010-11 के पंचायत चुनाव में आशा यादव बसपा के टिकट से जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थी। हालांकि वर्ष 2012 में सपा की सरकार बनने पर आशा यादव ने समाजवादी चोला ओढ़ लिया।
झेलना पड़ा था अपमान
आशा यादव की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद हरेंद्र यादव पत्नि आशा यादव के साथ बोर्ड बैठक में चले गए थे। इस मामले को मीडिया ने हाथों हाथ सुर्खियां बना डाला।
इससे हरेंद्र यादव को काफी जलालत झेलनी पड़ी थी। जिला पंचायत अध्यक्ष बनने से वह शान से बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करेंगे। हरेंद्र यादव दो बार सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव लडे़। दोनों ही बार हरेंद्र को पराजय हाथ लगी।
नहीं बोले कदीम
दिलचस्प बात यह है कि नामांकन करने की तैयारी से लेकर शुक्रवार को नहीं करने के कदम उठानेे तक कदीम फड्डा के नाम पर ही सबकुछ हो रहा था।
लेकिन मानमनौवव्ल के बाद जब मीडिया के सामने घोषणा की गई तब सब बोले लेकिन कदीम एकदम चुप रहे। सारे समय कदीम सभी के साथ रहे लेकिन चुप्पी साधे रखी। दरअसल, पहले से ही कदीम को अपने भाई रफीक फड्डा का डमी कहा जा रहा था।