बुलंदशहर। जिले के मॉडल गांवों का सर्वे होगा। इसके माध्यम से गांवों की जमीनी हकीकत परखी जाएंगी। इसके बाद नए सिरे से जरूरी विकास कार्य कराए जाएंगे। मॉडल गांवों में स्वच्छता और आधुनिक सुविधाओं पर 138 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।
जिले के सभी 16 ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाली सभी 946 ग्राम पंचायतों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया गया। इन गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर विशेष काम किया गया है।
अब इन मॉडल गांवों को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक और सुविधाओं से लैस करने के लिए विभाग नए वित्तीय सत्र 2026-27 में दोबारा से एक वृहद स्तर पर सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है।
इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि गांवों में विकास की वर्तमान स्थिति क्या है और आने वाले दिनों में वहां और किन नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता है।
जिला पंचाायत राज अधिकारी नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि विगत वर्षों में इन ग्राम पंचायतों को मॉडल गांवों के रूप में तब्दील करने के जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य किए गए हैं। गांवों को प्रदूषण और गंदगी से मुक्त करने के लिए ठोस- तरल कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके तहत सूखे व गीले कूड़े के सही निस्तारण के लिए आधुनिक प्लांट लगाए गए हैं। जिले को ओडीएफ प्लस की श्रेणी में मजबूती से बनाए रखने के लिए शत-प्रतिशत स्वच्छता सुनिश्चित करते हुए हर घर में शौचालय का निर्माण कराया गया है।
गांवों में पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलाने की दिशा में प्लास्टिक निस्तारण प्लांट भी स्थापित किए गए हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में कचरा प्रबंधन को एक नई और वैज्ञानिक दिशा मिली है। इन सभी ग्राम पंचायतों में फिर से सर्वे कराया जाएगा।
इस नए सर्वे के जरिए मौके पर जाकर यह देखा जाएगा कि मॉडल गांवों में वर्तमान में और क्या-क्या नए सुधार कराए जा सकते हैं। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर गांवों में जो भी छोटी-मोटी कमियां सामने आएंगी या जिन नई सुविधाओं की जरूरत महसूस होगी, उन्हें नए बजट के माध्यम से तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा ताकि ग्रामीण विकास के इस मॉडल को और बेहतर बनाया जा सके।