नगर पालिका परिषद की 302 दुकानों के किराया वृद्धि का पेचीदा मामला शासन को रेफर कर दिया गया है। बता दें कि कमिश्नर ने एडीएम वित्त से पूछा है कि एक साथ 10 से 15 गुणा किराए में वृद्धि क्यों की गई। एडीएम वित्त ने माना है कि व्यापारियों पर किराया नियम के विरुद्ध थोपा गया है।
फिलहाल, मामला एडीएम ने शासन को रेफर कर किराया निर्धारण की गाइडलाइन मांगी हैं। वर्ष-2014 में तत्कालीन नगर पालिका ईओ ने चेयरमैन पिंकी गर्ग के विरोध दर्ज कराने के बावजूद 302 दुकानों का किराया बढ़ा दिया था। ईओ ने जिन दुकानों का किराया 300-400 रुपये था वह बढ़ाकर 3000 से 4000 रुपये कर दिया था।
कालाआम की दुकानों का किराया 7000 रुपये कर दिया गया था। इसके विरोध में व्यापारी कमिशभनर के पास गए। कमिश्नर ने एडीएम वित्त से पूछा है कि एक साथ 10 से 15 गुना किराया किस नियम के तहत बढ़ाया गया है। शनिवार को एडीएम वित्त ने नगर पालिका के टैक्स अफसर और अधिवक्ताओं को बुलाया।
एडीएम ने पूछा कि किराए का निर्धारण किस पद्धति से किया गया। इस पर टैक्स अफसर ने डीएम सर्किल रेट का हवाला दिया। टैक्स अधिकारी ने यह भी बताया कि नियमावली में किराया बढ़ोतरी का जिक्र नहीं है, इसलिए डीएम सर्किल रेट के आधार किराया बढ़ोतरी की गई। डीएम ने मामले को सुलझाने के लिए फाइल शासन को भेज दी है।
किराया बढ़ोतरी का मामला शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से प्राप्त गाइड लाइन के आधार पर कमिश्नर को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सर्किल रेट के आधार पर किराया बढ़ोतरी गलत है।
- आरके सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व