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फिर कोहरे की चादर से ढका जिला, बढ़ी ठंड

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फिर कोहरे की चादर से ढका जिला, बढ़ी ठंड
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बुलंदशहर। तीन दिन मौसम साफ रहने के बाद सोमवार फिर जिले को कोहरे की सफेद चादर ने ढक दिया। कोहरे के बीच सर्द हवा चलने से अचानक ठंड भी बढ़ गई। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो गया। सुबह देर तक घना कोहरा छाए रहने से सभी को परेशानी उठानी पड़ी। वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलने को मजबूर होना पड़ा। बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर बाद धूप निकलने पर ही कुछ राहत मिली।
एक बार फिर मौसम में आए बदलाव से सोमवार अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस रहा। अद्रता 70 फीसदी और हवा की गति पांच किलोमीटर प्रति घटा रही। जिले में पिछले तीन दिन मौसम साफ था। इससे लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली। फसल को लेकर किसानों की चिंता भी कम हुई लेकिन सोमवार सुबह एक बार पूरा जनपद घने कोहरे की चपेट में आ गया। कोहरे का आलम यह था कि सुबह आठ बजे तक चंद कदम दूर पर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा थी। सड़क पर दौड़ रहे वाहनों की रफ्तार पर घने कोहरे ने अंकुश लगा दिया। वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। इसके बावजूद वाहन रेंगते रहे। कोहरे के साथ हवा चलने से ठंड अचानक बढ़ गई।
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सुबह मेहनत-मजदूरी करने जाने वालों के साथ कार्यालयाें में नौकरी करने वालों को भी परेशानी हुई और देरी से पहुंचे। खराब मौसम से आम जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त रहा। ठंड व कोहरे का असर बाजार पर भी दिखा। दोपहर बाद निकली धूप से ही कुछ राहत मिली और बाजारों व मार्गों पर रौनक बढ़ी। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल के अनुसार मंगलवार को अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8 डिग्री रहेगा। मौसम में आए बदलाव से अभी कोहरे से राहत नहीं मिलने वाली। वहीं, दूसरी ओर दो या तीन फरवरी को एक बार फिर मौसम में बदलाव की संभावना है। इस दौरान बादल छाने के साथ बारिश की भी संभावना बन रही है। यदि ऐसा होता है तो ठंड बढ़ेगी और कोहरा का असर 10 फरवरी तक जारी रह सकता है।
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फसल को लेकर किसान चिंतित
घने कोहरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कोहरे के असर से सरसों और आलू की फसल प्रभावित हो सकती है। कोहरे से आलू की फसल में पछेती झुलसा लगने की संभावना बढ़ गई है। इससे फसल की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है। तेज धूप निकले तो नुकसान से बचा जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि इस समय किसानों को आलू और सरसों की फसल को बचाना जरूरी है।
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