संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। नरसेना थाना क्षेत्र में दस नवंबर 2006 को पुलिस पर फायरिंग और बच्चे का अपहरण करने वाले चारों आरोपियों को न्यायालय ने दोषी माना है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट प्रशांत मित्तल ने चारों दोषियों को पांच-पांच साल के कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट योगेश कुमार ने बताया कि 10 नवंबर 2006 को तत्कालीन नरसेना थाना प्रभारी हरीशचंद्र जोशी ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि दस नंबर की देर शाम उन्हें सूचना मिली कि कस्बा निवासी साबुद्दीन के मकान के अंदर बदमाश छिपे हैं। सूचना पर वह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपियों की घेराबंदी शुरू कर दी लेकिन, तभी आरोपियों ने खुद को घिरता हुए देख पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। फायरिंग में पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई कर कुछ ही दूरी पर चारों आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों की शिनाख्त पदम सिंह निवासी गांव परसोती गढ़ी थाना सुरीर, रहीश निवासी गांव नरसेना, पूरन सिंह निवासी गांव परसोती गढ़ीर और नारायन सिंह निवासी गांव नौगांव थाना छाता मथुरा के रूप में हुई। आरोपियों के पास से एक अपहृत बालक बरामद हुआ था। बरामद बच्चे की पहचान सतीश निवासी गांव चौमुंहा थाना वृंदावन जनपद मथुरा के रूप में हुई थी।
पुलिस पूछताछ में चारों बदमाशों ने बताया कि गत 21 अक्तूबर को सतीश का अपहरण चौमुंहा थाना वृंदावन से किया था और सतीश के परिजनों से दस लाख फिरौती मांगी थी। फिरौती के लिए वह लगातार सतीश के परिजनों से संपर्क कर रहे थे। पुलिस ने सतीश को उनके परिजनों को सौंप आरोपियों को जेल भेज दिया था। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। न्यायालय ने अब दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन कर चारों आरोपियों को दोषी मानकर सजा सुनाई है।