प्रशासन की सख्ती के बाद भी जिले में सरकारी राशन की कालाबाजारी नहीं रुक रही है। इसका खुलासा नोएडा में पकड़ा गए बुलंदशहर के सरकारी राशन से हो गया है। पूरे मामले को विभागीय अफसरों ने अपनी नाकामी को छिपाने का भी प्रयास किया। मगर, रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कालाबाजारी खुल गई।
गेहूं की कालाबाजारी से बुलंदशहर और गाजियाबाद के भी माफिया शामिल हैं। जिले में फूड सिक्योरिटी का राशन अप्रैल में अफसरों की मौजूदगी में गोदाम से उठा। दुकानों पर पहुंचने पर क्रास चेकिंग करवाई तो 27 दुकानों पर गड़बड़ी मिली। विभाग ने तीन एफआरआई और दुकानों को कैंसल कर अपनी पीठ थपथपा ली।
मगर, तीन दिन पहले नोएडा में चार ट्रैक्टर-ट्रालियों में बेचने को ले जाया जा रहा सरकारी गेहूं पकड़ा जाने से अफसरों की चुस्ती और दावों की भी पोल खोल दी। कालाबाजारी को ले जाए जा रहे गेहूं को जब्त कर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। इस बात का पता जब जिला स्तरीय अफसरों को चला तो पूरे मामले को दबा लिया गया।
कालाबाजारी से जुड़े बुलंदशहर और गाजियाबाद के माफिया जब अपने को बचाने सफेदपोशों के संपर्क में पहुंचे तो मामला खुल गया। इससे साफ हो गया है कि जिले में सरकारी राशन की कालाबाजारी जारी है और प्रशासन द्वारा की गई सख्ती के बाद भी नहीं रुक पाई। वहीं विभागीय अफसर कुछ दुकानों पर कार्रवाई कर अपनी खुद की पीठ थपथपा रहे हैं।
नोएडा में पकड़ा गए गेहूं के मामले में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। गेहूं सहित पकडे़ गए लोगों ने किसानों से गेहूं खरीदने की बात कर रहे हैं। मगर, वह पुलिस को गेहूं खरीद संबंधी कोई सबूत पेश नहीं कर पाए हैं। यह गेहूं तक तक सरकारी नहीं माना जा सकता। जब तक उसकी जांच न हो जाए। इसकी जांच की जा रही है। यदि गेहूं सरकारी है तो पता लगाया जाएगा कि वह कहां से बेचा गया। सच्चाई सामने आने पर कानूनी करवाई करवाई जाएगी। - केबी सिंह, डीएसओ