अब फसल वेस्ट जलाने पर होगी एफआईआर
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खेत में फसल अवशेष जलाने पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नही पुनरावृत्ति होने पर किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। प्रदूषण का ग्राफ रोकने के लिए डीएम गांवों में डोर-टू- डोर अभियान चलवाकर किसानों को जागरुक करेंगे।
जनपद में कृषि अवशेषों को खेत में फूंकने का चलन है। इससे न सिर्फ खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है, बल्कि भूमि का स्ट्रक्चर भी बिगड़ जाता है। लगातार ऐसा करने से कुछ समय बाद कृषि भूमि पैदावार करने लायक नहीं रहती। फसल अवशेष से निकले जहरीले धुंए से पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचती है।
इसी लिए पर्यावरण और कृषि भूमि को नुकसान से बचाने के लिए कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। यदि अब कृषि अवशेषों को खेत में फूंका गया तो किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर कृषि डा. घन श्याम वर्मा ने बताया कि कृषि अवशेष फूंकने वाले किसानों पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। फिर भी किसान नहीं मानते हैं कि कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
वहीं डीएम ने इससे होने वाले नुकसान से किसानों को रुबरु कराएगे। डीएम ने प्रदूषण नियंत्रण केलिए बनाई गई कमेटी को जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी है। अफसर और कर्मचारी गांव गांव पहुंचकर किसानों को पर्यावरण और कृषि भूमि को होने वाले नुकसान के विषय में जानकारी देंगे।
उल्लेखनीय है कि बीते साल फसल कटने के बाद खेत में पुआल जलाने से हुए प्रदूषण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से स्थानीय स्तर से भी इसकी रोकथाम की कवायद शुरू हुई थी।