बुखार का कहर जनपद में बढ़ता ही जा रहा है। बुखार से दो महिलाओं समेत पांच व्यक्तियों ने दम तोड़ दिया। जनपद में बुखार से मरने वालों का आंकड़ा अब 102 पहुंच गया है।
जनपद के अहमदगढ़ क्षेत्र के गांव खेलिया निवासी कदीर पुत्र वसीर खां की तबीयत पिछले कई दिनों से खराब चल रही थी।
उसका उपचार क्षेत्र के एक अपंजीकृत चिकित्सक के यहां चल रहा था। उसकी तबीयत शुक्रवार रात अचानक खराब हो गई। उसे शनिवार को एक चिकित्सक के यहां ले जाया गया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
इसके अलावा सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव बैर निवासी शंभू पुत्र प्रभुदयाल की तबीयत भी पिछले कई दिनों से खराब थी। उसे शुक्रवार शाम बुलंदशहर के एक अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसने उपचार के दौरान शनिवार को दम तोड़ दिया।
इसके अलावा सिकंदराबाद के मोहल्ला बंसल सिनेमा के पास निवासी रहीसा पत्नी शरीफ की तबीयत भी पिछले कई दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार रात रहीसा की तबीयत अचानक खराब हो गई। शनिवार सुबह रहीसा ने बुखार से दम तोड़ दिया। जनपद में तीन मौतों के साथ ही जनपद में बुखार से मरने वालों का आंकड़ा अब 100 पहुंच गया है।
खुर्जा के पंजाबियान निवासी अनस (14) पुत्र इस्लाम पिछले दो दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन किसी प्राइवेट चिकित्सक से उसका इलाज करवा रहे थे। शनिवार दोपहर करीब 11 बजे उसकी मौत हो गई।
वहीं पंजाबियान मोहल्ला निवासी सकीला (26) पत्नी सकील को चार दिनों से बुखार आ रहा था। परिजन निजी चिकित्सकों से उसका उपचार करवा रहे थे। शनिवार सुबह सकीला ने भी दम तोड़ दिया।
बंद रहते हैं सरकारी अस्पताल
पूर्व में डीएम के आदेश पर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को हाल जानने के लिए निरीक्षण कराया गया था। निरीक्षण में 12 डाक्टर गायब मिले। 13 अस्पतालों पर ताला लटका पाया गया। बाकी स्टाफ भी गायब मिला। ऐसे में गरीब मरीजों के सामने भटकने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं है।
सरकारी रिकार्ड में नहीं हुई मौत
जनपद में डेंगू, मलेरिया, चिकन गुनिया से लोग दहशत में हैं। डेंगू मलेरिया और चिकन गुनिया से अब तक 100 से अधिक मौत हो चुकी हैं। खासबात यह है कि सरकारी रिकार्ड में एक भी मौत का जिक्र नहीं किया गया है।
बता दें कि हाल ही उन मुख्य चिकित्सा अधिकारियों का शासन ने तबादला कर दिया था जिन जनपदों में बुखार का कहर बरकरार है। सूत्रों की मानें तो कार्रवाई से बचने के रिकार्ड निल रखा गया है।
सबसे अधिक बुखार से हुई मौत
अब तक बुखार 100 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। मौत डेंगू से चार, चिकन गुनिया से सात और मलेरिया से 18 मौत हो चुकी है। इनमें एक फूड सेफ्टी अफसर, रिटायर सीओ, दरोगा, पिता पुत्र की मौत भी हो चुकी है।
अस्पताल में इंतजाम नाकाफी
100 से अधिक मौत होने के बाद भी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन नहीं है। डेंगू, चिकनगुनिया की जांच के लिए मरीजों को प्राइवेट डाक्टरों का रुख करना पड़ रहा है। अफसरों ने गांवों में डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के तरीकों को प्रचार भी नहीं किया है।