अब तक तक देश में जितनी भी सरकारें बनीं हैं, सबने किसानों के साथ छलावा किया है। सरकारों ने किसानों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया है।
यहां तक कि किसानों के हित के लिए कार्यपालिका द्वारा कार्य न करने की स्थिति में कोर्ट को आदेश करने पड़ रहे हैं। लेकिन सरकारें उन आदेशों को लागू कराने में भी हीलाहवाली कर रही है।
यदि किसान हित की योजनाओं को लागू कराना है तो किसानों के हित की लड़ाई लड़ने वालों की सरकार बनानी होगी।
उक्त विचार राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने जखैता में आयोजित किसानों की नुक्कड़ सभा में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि वह 20 साल से गन्ना किसानों की लड़ाई खेत से लेकर अदालत तक लड़ रहे हैं। अब धान व आलू की भी लड़ाई लड़ी है, जिसका फायदा धान व आलू किसानों को हुआ है।
उन्होंने कहा कि 14 दिन बाद गन्ना बकाया पर मिल को उसका ब्याज अदा करना होता है। अगौता मिल का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि संगठन ने गन्ना बकाया पर कोर्ट से 1306 करोड़ रुपया ब्याज किसानों को देने का आदेश कराया था, जिसे सरकार नहीं मान रही है।
उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने वाले किसान संबंधित बैंक से मुआवजा ले सकते हैं। यह बात अदालत भी मान चुकी है।
उन्होंने कहा कि किसानों को अपने हित की लड़ाई लड़ने के लिए संगठित होकर अपनी सरकार बनानी होगी। इस दौरान पार्टी के प्रदेश महासचिव सरदार जगपाल सिंह, जिलाध्यक्ष जबर सिंह, अजयपाल सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, अर्जुन सिंह, सुंदर प्रधान मौजूद रहे।