खाद्य सामग्री में मिलावट का जहर बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि फूड आइटम में मिलावटखोर ऐसे रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो शरीर को खोखला कर देते हैं। ब्रेड पकोड़ा, बूंदी का लड्डू और सरसों के तेल को चटक पीला रंग देने के लिए रासायनिक कलर का प्रयोग किया जा रहा है।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। फूड सेफ्टी विभाग के डॉ. गौरी शंकर ने बृहस्पतिवार को प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। डीओ ने बताया कि मार्च और अप्रैल माह में 59 नमूने प्रयोगशाला भेजे गए थे।
नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इनमें 31 खाद्य सामग्रियां शुद्धता की कसौटी पर पास नहीं हो सकीं। आइसकैंडी घोल, छेना, पेठा लड्डू, ब्रेड पकोड़ा, सरसों का तेल, दूध, बूंदी का लड्डू, चूना पानी, बालूशाही और सोनपापड़ी असुरक्षित निकली हैं।
सरसों का तेल, बूंदी का लड्डू, बालूशाही, सोनपापड़ी में चटक पीला रंग देने के लिए रासायनिक रंग का प्रयोग किया गया था। कुल मिलाकर 10 नमूनों की रिपोर्ट अनसेफ आई है। इसके अलावा दूध के 11 नमूने, पनीर क्रीम और नमकीन समेज कुल 21 नमूने अधोमानक पाए गए हैं।
मिलावटखोरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। अधोमानक केसों को एडीएम की कोर्ट और अनसेफ केसों को सिविल कोर्ट में दायर कराया जाएगा।