पावर कारपोरेशन में अफसरशाही के आगे सारे नियम-कायदे धरे के धरे हैं। बिजली अफसरों का अब एक नया कारनामा सामने आया है। आयोग से नियुक्त किए गए नए अवर अभियंताओं (जेई) को टीजीटू विद्युत और टीजीटू लाइनों के नीचे काम करना पड़ रहा है। जेई संघ ने इसकी शिकायत एमडी मेरठ से की है।
पावर कारपोरेशन में पिछले दिनों 17 नए अवर अभियंता नियुक्त किए गए थे। इन अवर अभियंताओं को बिजलीघरों पर नियुक्त किया जाना था। सर्किल द्वितीय में तो सभी अवर अभियंता बिजलीघराें पर नियुक्त किए गए, लेकिन सर्किल प्रथम के बुलंदशहर और खुर्जा खंड में इन्हें टीजीटू प्रभारियों के नीचे अटैच कर दिया गया। जबकि जेई का पद टीजीटू से बड़ा होता है।
नियमत: किसी भी जेई को टीजीटू के नीचे नियुक्त नहीं किया जा सकता है। अफसरों की इस कार्यप्रणाली के विरोध में जेई संघ ने मोर्चा खोल दिया है। जेई संघ ने इसकी शिकायत एमडी पश्चिमांचल से की है। जेई संघ के संरक्षक आरसी द्विवेदी का कहना है कि अफसराें द्वारा मनमानी की जा रही है।
अवर अभियंताओं को टीजीटू प्रभारियों के नीचे काम करना पड़ रहा है, जो असंवैधानिक है। यदि इन्हें टीजीटू के अंडर से नहीं हटाया गया तो विरोध किया जाएगा।