इस चुनाव में गायब हो गया हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा
बुलंदशहर। जनपद की फिजा में चुनावी शोर घुल चुका है। राजनीतिक दल प्रत्याशियों की घोषणा कर चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में मतदाताओं के बीच दल और चुनावी मुद्दों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अधिवक्ताओं से जब उनके मुद्दों के बारे में बात की गई तो पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच, अधिवक्ताओं के लिए पेंशन, दुर्घटना में मौत पर आर्थिक मदद को एजेंडे में रखने वाले दलों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई। वहीं, जनपद न्यायालय में विधि कार्य करने वाले अधिवक्ताओं में तो इस बार खास तौर पर इस बात को लेकर रोष है कि प्रत्याशी और दल पश्चिम में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे को दरकिनार कर चुके हैं।
बोले अधिवक्ता
धर्म और जाति से ऊपर उठें दल
प्रदेश में ऐसी सरकार बननी चाहिए जो धर्म एवं जाति से ऊपर उठकर विकास के लिए काम करे। राजनीतिक दलों के एजेंडे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होनी चाहिए, जिससे जनता को सस्ता एवं सुलभ न्याय मिलेगा। अधिवक्ताओं के हितों की पैरवी करने वाले दल को प्राथमिकता दी जाएगी। वोट भी ऐसे ही प्रत्याशी को दिया जाएगा, जो उनकी मांगें मानेगा। - संजय दीक्षित, अध्यक्ष सिविल बार एसोसिएशन
अधिवक्ताओं को पेंशन मुख्य मुद्दा
पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना, अधिवक्ताओं के हितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के साथ ही साठ वर्ष से अधिक उम्र के अधिवक्ताओं के लिए पेंशन और निशुल्क मेडिकल की सुविधा उपलब्ध कराना प्रमुख मुद्दा है। जो भी प्रत्याशी या राजनीतिक दल इन्हें मुखर होकर विधानसभा में उठाने का भरोसा दिलाएगा, वोट उसी को जाएगा।
- देश दीपक, अधिवक्ता
तहसील स्तर पर हों दीवानी न्यायालय
जिला मुख्यालय पर प्रेक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं में से भी जजों की नियुक्ति की जाए। तहसील स्तर पर दीवानी न्यायालयों की स्थापना की जाए। अधिवक्ता सुरक्षा कानून भी प्रदेश में लागू होना चाहिए। नए अधिवक्ताओं को चेंबर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही खासतौर पर हाईकोर्ट बैंच की पश्चिम में स्थापना कराने में सहयोग करने वाले नेता को ही इस बार चुना जाएगा। - केपी सिंह, अधिवक्ता
दुर्घटना बीमा और पेंशन जरूरी
हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के अलावा भी कई अहम मुद्दे अधिवक्ताओं के हैं लेकिन कोई भी दल या प्रत्याशी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। खासतौर पर दुर्घटना में मौत पर बीस लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराने के साथ ही साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर पेंशन का प्रावधान किया जाए। पश्चिमी यूपी में बेंच की स्थापना इस चुनाव में अधिवक्ताओं का प्रमुख मुद्दा रहेगा। - गोपाल सिंह, अधिवक्ता
युवा हितों का रखा जाए ध्यान
ऐसे दल या प्रत्याशी को वोट देंगे, जो युवाओं के हित के लिए कार्य करे। युवा अधिवक्ता को उसकी वकालत के संघर्ष के दिनों में मासिक भत्ता दिलाए। अदालतों में सुरक्षित माहौल, पर्याप्त संख्या में जजों की नियुक्ति और तहसील स्तर पर दीवानी न्यायालयों की स्थापना प्रमुख मुद्दे हैं। - रिहाना परवीन, अधिवक्ता
तीन तलाक का मुद्दा भी हुआ गायब
समाजसेवी राना नदीम ने कहा कि इस बार कोई भी प्रत्याशी तीन तलाक के मुद्दे पर बात नहीं कर रहा है। जबकि, बीते दिनों सरकार का तीन तलाक पर आया कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ था। हालांकि, अभी भी कुछ स्थानों पर तीन तलाक के मामले सामने आ रहे हैं। इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए।