मिलें संसाधन तो विदेशों में बढ़ेगी आम की मिठास
बुलंदशहर। स्याना और बुगरासी का आम भारत के विभिन्न राज्यों के साथ कई देशों में पसंद किया जाता है लेकिन यहां के आम उत्पादकों का दर्द पिछली सरकारों ने नहीं सुना है। किसानों का कहना है कि स्याना और बुगरासी में प्रोसेसिंग ग्रेडिंग शर्टिंग पैकेजिंग, क्वालिटी मैनेजमेंट और मार्केट की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो यहां के किसानों की आय कई गुना बढ़ जाएगी। सरकारों से मांग की गई है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी का कहना है कि 100 वर्ष से पहले यहां देशी आम के बाग होते थे। इनका किसान अपने खाने में इस्तेमाल करते थे। खेती भी परिवार की जरूरत के लिए की जाती थी। धीरे-धीरे लोगों ने इसको व्यवसाय के रूप में देखना शुरू कर दिया। 1960 के आसपास सबसे पहले आम को दिल्ली की मंडियों में भेजना शुरू किया गया। इसके बाद यह अलीगढ़, आगरा, मथुरा व अन्य आसपास के जिलों में यहां का आम जाना शुरू हो गया। धीरे-धीरे यहां के आम की डिमांड हरियाणा और राजस्थान में होने लगी। इसके बाद तो सभी राज्यों में स्याना से आम जाना शुरू हो गया। 1990 में पहली बार स्याना और बुगरासी का आम विदेश में गया। उसके बाद से लगातार विभिन्न देशों में यहां का आम पसंद किया जा रहा है। सबसे ज्यादा जापान, सिंगापुर और चीन में यहां का आम जा रहा है। आम की वैरायटी चोसा, दशहरी, लंगड़ा सबसे ज्यादा पंसद किए जाते हैं।
14 हजार हेक्टेयर में हो रही आम की पैदावार
आम उत्पादकों ने बताया कि जिले में 14 हजार हेक्टेयर में आम की पैदावार हो रही है। इसमें सबसे ज्यादा पैदावार स्याना तहसील में होती है। इससे सटे हुए बुगरासी, ऊंचागांव और अनूपशहर बेल्ट में भी आम का उत्पादन काफी है। स्याना तहसील के करीब 100 से अधिक गांव में आम का उत्पादन किया जाता है। पिछले दो साल में आम उत्पादक किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। कोरोना की वजह से अधिकतर आम बाहर नहीं जा सका। ऐसे में किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल पाए। गांव गजरोला निवासी किसान जगनेश, रामनरेश और ऊंचागांव निवासी राजकुमार ने बताया कि कोरोना के समय हुए नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी है।
सरकार से किसानों की मांग
- प्रोसेसिंग ग्रेडिंग शर्टिंग पैकेजिंग की सुविधा
- क्वालिटी मैनेजमेंट की सुविधा
- जैविक खाद की उपलब्धता
- मार्केटिंग की सुविधा
- ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देकर रेल यातायात की व्यवस्था
- प्रोसेसिंग मशीन उपलब्ध कराई जाएं
- सरकार कृषि उत्पादन पर काम करे
- लोहे के स्थान पर स्टील के टैंकर उपलब्ध कराए जाएं
- आम तोड़ने की मशीनेँ उपलब्ध कराई जाएं
- आम की इंटरनेशनल क्वालिटी पर काम किया जाए
आम की फसल का बीमा कराए सरकार
आंधी बारिश से हर साल आम की फसल को काफी नुकसान होता है। पहले भी सरकारों से मांग की गई है कि आम की फसल का बीमा कराए जाए, जिससे नुकसान होने पर किसानों को उसको लाभ मिल सके। सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए। साथ ही सर्वे कराने की भी व्यवस्था करे। - भारत भूषण त्यागी, प्रगतिशील किसान
फसल पर नहीं मिलता है लोन
कृर्षि पर लोन मिलता है, लेकिन आम की फसल पर सरकार लोन नहीं देती है। आम की फसल पर लोन दिया जाए, जिससे देश के किसान उसका लाभ लें और आम उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सकें। - आफाकुर्रहीम खान, आम उत्पादक
कंपनी से कांट्रैक्ट की हो व्यवस्था
स्याना ग्रीन बेल्ट है, यहां सरकार को प्रोसेसिंग यूनिट लगानी चाहिए। हम यहां से आम आजादपुर मंडी भेजते हैं, वहां से विदेशों में जाता है। सरकार किसी कंपनी से कांट्रैक्ट कराकर सीधे विदेश भिजवाने की व्यवस्था कराए। - दीपक त्यागी, प्रगतिशील किसान
ओडीओपी में आम की फसल को किया जाए शामिल
आने वाली सरकार से मांग करते हैं कि वह आम की फसल को भी ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) में शामिल करे, जिससे किसानों को लाभ मिल सके। इस साल 150 टन आम जापान गया था। इसी तरह से अन्य देशों में भी जा सके। - केदार सिंह त्यागी, आम उत्पादक