क्षेत्र के जांबाजों ने सन् 1999 में कारगिल में अपने अदम्य साहस से पाकिस्तान की कारगिल हथियाने की नापाक हरकत को नाकाम कर दिया था। कुरली गांव निवासी ऋषिपाल सिंह डागर 17वीं जाट रेजीमेंट में नायक थे।
छह जुलाई 1999 की रात को उसकी कंपनी ने कारगिल के पशकोह क्षेत्र में पाक घुसपैठियों के गुप्त ठिकानों पर हमला किया था। जबरदस्त मुठभेड़ में 15 पाक घुसपैठियों को जांबाज सैनिकों ने मौत की नींद सुला दिया।
अकेले ऋषिपाल ने आठ घुसपैठियों को मार गिराया था। इसके साथ ही वह मात1भूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। ऋषिपाल सिंह की स्मृति में गांव कुरली में उनका स्मारक स्थापित किया गया है।
प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप
कुरली निवासी कारगिल शहीद ऋषिपाल सिंह की पत्नी मुकेश देवी ने प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ऋषिपाल की शहादत के बाद प्रशासन ने बीस बीघा जमीन देने की घोषणा की थी, परंतु प्रशासनिक कार्यालयों के अनेक चक्कर काटने के बाद भी उसे पूरी जमीन नहीं दी गई है।
इससे आहत मुकेश देवी ने बताया कि उसे केवल 13 बीघा जमीन ही दी गई है। जोकि 5 बीघा एवं 8 बीघा दो स्थानों पर है। मुकेश देवी ने यह भी बताया कि उसके घर के बाहर रास्ता भी ठीक से नहीं कराया गया है।
परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव की बहादुरी को सलाम
क्षेत्र के ग्राम औरंगाबाद अहीर निवासी योगेंद्र सिंह यादव को कारगिल युद्ध के बाद राष्ट्रपति द्वारा भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया। योगेंद्र यादव अब 14 ग्रिनेडियरस में सूबेदार हैं।
योगेंद्र यादव ने 3 जुलाई 1999 को कारगिल के टाइगर हिल्स पर अपने शरीर पर 19 गोलियां खाकर भी दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया था। योगेंद्र 7 जवानों की टोली का नेतृत्व कर रहे थे। जिसे घातक दस्ते का नाम दिया गया था।
ये भी हैं कारगिल के हीरो
क्षेत्र के गांव खंगावली निवासी राज सिंह मलिक छह जुलाई 1999 को कारगिल में टाइगर हिल पर मशकोह घाटी में पाक घुसपैठियों के कब्जे से चौकी को आजाद कराते समय शहीद हो गए। राज सिंह मलिक 17वीं जाट रेजीमेंट के सिपाही थे।
उनकी स्मृति में गांव सैदपुर में शहीद स्मारक बनाया गया है। राज सिंह के अतिरिक्त 17वीं जाट रेजीमेंट के नायक सैदपुर निवासी सुरेंद्र सिंह 12 जून 1999 को दुश्मनों के कब्जे से बोरोलिंग चोटी को मुक्त कराते हुए शहीद हो गए। खैरपुर निवासी जांबाज ओमप्रकाश 29 जून 1999 को तोलोलिंग टाइगर हिल्स के को मुक्त कराते समय शहीद हुए थे।