औरंगाबाद में मोहर्रम के अवसर पर चांद की पांच तारीख को सबीहे दुलदुल घोड़े का जुलूस निकाला गया। मोहल्ला सादात स्थित बड़ वाले इमाम बाड़े से शिया समुदाय के शाहिद नकवी ने पहला मरसिया पढ़कर जुलूस की शुरूआत की। जुलूस में शोक के प्रति शिया समुदाय के लोग नंगे पैर काले वस्त्र पहनकर मातम करते हुए चल रहे थे।
जबकि चार लोग हाथों में अलम लिए हुए थे। श्रद्धालुओं ने दुलदुल घोडे को चने की दाल और जलेबी खिलाई। जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ पीपल के नीचे पहुंचकर मातम में तब्दील हो गया। लोगों ने यहां अपने शरीर को खून से लहुलूहान कर लिया और वहां समाप्त हो गया।
जुलूस में सलमान अहमद नकवी के सौजन्य से तबरूफ का वितरण किया गया। जुलूस में हसनैन अब्बास नकवी, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद अमीर, नफीसुल हसन, अरसद अब्बास, केसर अब्बास नकवी, जर्रार हुसैन उर्फ पोलू, महराज हुसैन, सलमान हैदर आदि मौजूद रहे।
अली असगर का झूला निकाला
क्षेत्र के गांव चरौरा मुस्तफाबाद में शनिवार को जनाबे अली असगर का झूला निकाला गया। झूले में शिया सोगवारों ने जोरदार सीनाजनी कर मातम किया। जुलूस नवाब खां के इमामबाड़े से शुरू हुआ और बाबूजान के इमामबाड़े पर पहुंचकर तवरूफ बांटकर संपन्न हुआ।
सोमवार को दुलदुल घोड़े का जुलूस निकाला जाएगा। इस मौके पर मौलाना अली मोहम्मद, कासिम अहमद, सलमान हैदर, फरमान खां, हाजी साबिर, जाहिद हुसैन, अमीर हसन आदि मौजूद रहे।
शिया सोगवारों ने निकाला मोहर्रम का जुलूस
शनिवार को करबला के शहीदों की याद में शिया सोगवारों ने मोहर्रम का जुलूस निकाला। शाम पांच बजे काजीवाड़ा स्थित मौलाना अली अब्बास रिजवी के इमामबाड़े से अलम का जुलूस बरामद हुआ। जुलूस कैनरा बैंक, बड़ा बाजार, हनुमान चौक, बतासे वाली गली, जामा मस्जिद, हाईवे से होते हुए कैनरा बैंक पर आकर ही समाप्त हुआ।
आयोजक मदाम अब्बास रिजवी ने बताया कि 1400 वर्ष पूर्व यजीद ने हक की पैरोकारी करने पर इमाम हुसैन समेत उनके परिवार के 72 लोगों को करबला के मैदान में शहीद कर दिया था। उन्हीं की याद में मोहर्रम मनाया जाता है।
जुलूस में शिया सोगवारों ने करबला के शहीदों की याद में सीना-जनी भी की। जुलूस में शाह अब्बास, नूर अब्बास, रजा अब्बास, युनुस, युसुफ पटेल, इकबाल सैफी, गुलाम असकरी, मो. मिनहाज, शाह हुसैन, आसिफ, साजिद सैफी, इरशाद शमशेर अली आदि का सहयोग रहा।