जनपद में गेहूं की खरीद शुरू नहीं होने पर प्रशासन हरकत में आ गया है। डीएम ने मंगलवार को जिला विपणन अधिकारी से गेहूं खरीद शुरू नहीं होने कारण पूछ लिया है। साथ ही डीएम ने समस्त उपजिलाधिकारियों को क्रय केंद्रों के सत्यापन का आदेश भी दिया है।
बता दें कि गेहूं खरीद नहीं होने का मुद्दा अमर उजाला एक अप्रैल से मुहिम के रूप में प्रकाशित कर रहा है। जनपद में 1525 रुपये क्विंटल की दर से 88 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद होनी है। खास बात यह है कि पांच दिन बीत जाने के बाद भी एक भी क्रय केंद्र पर गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हुई है।
जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि गेहूं की कटाई और थ्रेशिंग शुरू नहीं हुई है। जहां थ्रेशिंग हुई है वहां गेहूं एफसीआई के मानक पर खरा नहीं है। इसीलिए क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं खरीदा गया। बता दें कि एक से पांच अप्रैल तक सिर्फ बुलंदशहर की अनाज मंडी में किसान 350 बोरे गेहूं बेच चुके हैं।
ऐसे में अफसरों का यह दावा कि गेहूं की थ्रेशिंग शुरू नहीं हुई, गलत है। अफसरों की इसी हीलाहवाली के कारण किसानों को 80-90 रुपये प्रति क्विंटल की चपत लग रही है। खुद डिप्टी आरएमओ ने मंडी का जायजा लेने के बाद यह स्वीकार किया है।