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बिटिया का इलाज परिजन करा नहीं सकते,डॉक्टर कर नहीं पा रहे

Tue, 07 Jun 2016 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
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अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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जर्जर बिजली तारों की चपेट में आई बिटिया अब इलाज के लिए तड़प रही है। जिला अस्पताल में भर्ती बिटिया के इलाज को लेकर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। संशाधन उपलब्ध न होने के कारण बिटिया का उपचार यहां संभव नहीं है।
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बिटिया का उपचार दिल्ली, नोएडा या मेरठ ही संभव है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बिटिया के परिजन इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। डीएम रोड स्थित झुग्गी निवासी ई-रिक्शा संचालक अख्तर ने बताया कि उसकी 12 वर्षीय बेटी चांदनी 20 अक्तूबर 2015 को सुबह करीब 11 बजे नजदीक से ही दूध लेने गई थी। एलआईसी कार्यालय के पास 11 हजार की लाइन का जर्जर तार उसके ऊपर गिर गया।

11 हजार की लाइन की चपेट में आने से चांदनी बुरी तरह झुलस गई। चांदनी का चेहरा भी बुरी तरह झुलस गया। उसका एक हाथ झुलसने के कारण काफी खराब हो गया। उसे दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका एक हाथ काट दिया गया। डॉक्टरों ने चांदनी को पूरी तरह ठीक करने के लिए उसकी प्लास्टिक सर्जरी करने की बात कही।
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परिजनों के पास पैसा नहीं होने के कारण सफदरगंज में इलाज नहीं हो पाया। परिजनों ने पावर कारपोरेशन अफसरों को पत्र लिखकर मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिजनों की शिकायत के बाद प्रशासनिक अफसरों ने मामले पर जांच बैठाई, लेकिन यह जांच सिर्फ कागजों तक सिमट गई।

इलाज के अभाव में चांदनी की स्थिति अब ज्यादा खराब होने लगी है। चांदनी की गंभीर हालत देख जिला अस्पताल प्रबंधन के भी हाथ-पैर फूलने लगे हैं। चांदनी का उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं है। उसे प्लास्टिक सर्जरी और बेहतर उपचार की दरकार है।

चांदनी की स्थिति काफी खराब है। उसका उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं है। उसे बचाने के लिए उसकी प्लास्टिक सर्जरी की जानी है। जिसके लिए उसे नोएडा, दिल्ली या मेरठ के बड़े अस्पताल में भर्ती करना होगा। उसके परिजनों को इस बाबत सूचित किया जा चुका है। - डॉ. प्रीतम सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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