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तीन हत्यारों को मिली जमानत

Wed, 26 Oct 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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इंस्पेक्टर डीपी गौड़ की हत्या के 25 साल बाद जिन छह लोगों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, उनमें से तीन को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत उनके आपराधिक रिकार्ड न होने के आधार पर मिली है। वहीं आपराधिक रिकार्ड के चलते दो की जमानत खारिज हो गई।

इस मामले के सजा काट रहे छठे दोषी की जेल में ही बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। बता दें कि नौ अक्तूबर 1989 को डिबाई कोतवाली क्षेत्र में इंस्पेक्टर डीपी गौड़ की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
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मृतक के भाई नरेंद्र गौड़ ने योंगेंद्र पुत्र मोहकम सिंह निवासी बझैड़ा थाना रामघाट, संजय दीक्षित पुत्र श्याम विहारी निवासी धारिकापुर थाना रामघाट, प्रमोद कुमार शर्मा पुत्र प्रेम नारायण निवासी मुज्जफराबाद थाना फतेहपुर जिला सहारनपुर, हरपाल पुत्र रामगोपाल निवासी जयरामपुर खादर थाना नरौरा, चंद्रपाल,

संजय कुमार पुत्र श्रीराम पंजाबी निवासी कस्बा व थाना डिबाई, वीरपाल पुत्र मोहकम सिंह निवासी बझैड़ा थाना रामघाट, महेंद्र कुमार कौशिक पुत्र रामदेव सिंह निवासी सिविल लाइन थाना नगर बरेली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी महेंद्र कुमार कौशिक को 120बी का मुल्जिम बनाया था जबकि वीरपाल फरार था।

तीन अगस्त 2015 को न्यायाधीश ने महेंद्र कौशिक को बरी करते हुए शेष छह आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके अगले दिन चार अगस्त 2015 को सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अधिवक्ता हर्षवर्धन दीक्षित ने बताया कि जेल में सजा काटने के दौरान संजय साहनी की करीब छह माह पहले मौत हो गई।

हाईकोर्ट के जज प्रभात चंद त्रिपाठी और विक्रम नाथ की बेंच ने पांच अक्तूबर 2016 को प्रमोद शर्मा को और 24 अक्तूबर 2016 को संजय दीक्षित और हरपाल को जमानत दी। वहीं योगेंद्र सिंह और चंद्रपाल के आपराधिक इतिहास को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर दी।

विनय पाठक की हत्या का भी आरोपी है वीरपाल
इंस्पेक्टर डीपी गौड़ की हत्या के मामले में फरारी काट रहा वीरपाल पुत्र मोहकम सिंह अलीगढ़ के अधिवक्ता विनय पाठक की हत्या का भी आरोपी है। वीरपाल ने 25 दिसंबर 2014 को रामघाट थाना क्षेत्र के गांव बझेड़ा में विनय पाठक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 7 जनवरी को पुलिस ने खुलासा करते उसके दो नौकरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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तीन दर्जन मुकदमों में शामिल है योगेंद्र बझेड़ा
वर्ष 1980 में रामघाट थाना क्षेत्र में योगेंद्र बझेड़ा के खिलाफ एक राय होकर जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद हत्या, जानलेवा हमला, मारपीट जैसे करीब तीन दर्जन से अधिक मामले बुलंदशहर के अलावा अलीगढ़, हाथरस, नोएडा में दर्ज हुए।



 
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