कारपोरेशन अफसरों की लापरवाही से एक और संविदा कर्मी मौत का शिकार हो गया। शटडाउन लेकर काम कर रहे कर्मी की अचानक लाइन चालू होने से दर्दनाक मौत हो गई। करीब 20 मिनट तक कर्मी करंट से लगी आग में झुलसता रहा। गुस्साए परिजनों ने मौके पर पहुंचे जेई की जमकर पिटाई की और उसको एक कमरे में बंद कर दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। गुस्साएं ग्रामीणों ने रात तक शव सड़क पर रखकर जाम लगा रखा है। देर रात दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी अमरदीप (20) पुत्र खेमचंद्र बुगरासी बिजलीघर पर संदेशवाहक के रूप में संविदा पर तैनात था।
दोपहर करीब 11 बजे वह शटडाउन लेकर जलालपुर-हाजीपुर के जंगल में ट्रांसफार्मर पर लाइन जोड़ने गया था। वह लाइन जोड़ ही रहा था कि करीब 11.30 पर लाइन में अचानक सप्लाई आ गई। लाइन चालू होने से वह करंट की चपेट में आ गया।
कमर पर बेल्ट बंधी होने के कारण वह ट्रांसफार्मर पर ही लटका रहा, जिससे उसके शरीर में आग लग गई। करीब 20 मिनट तक वह ट्रांसफार्मर पर ही टंगा रहा और आग की लपटों में जलता रहा। कमर पर बंधी बेल्ट पूरी तरह जलने के बाद शव नीचे गिरा।
आसपास मौजूद लोगों ने देखा तो बिजलीघर पर इसकी सूचना दी। मौके पर अमरदीप के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे जेई सचिन कुमार को लोगों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसके बाद जेई को पास के क्रेशर पर बने कमरे में बंधक बनाकर ताला लगा दिया।
सूचना पर बुगरासी चौकी प्रभारी महीपाल सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन गुस्साए लोगों ने एक नहीं सुनी। लोगों ने पीड़ित के परिजनों को 10 लाख रुपये आर्थिक मदद देने की मांग की। मौके पर पहुंचे एसडीओ धर्मेंद्र कुमार ने तीन लाख रुपये तत्काल मदद और चार लाख रुपये तीन महीने में किश्तों में देने का आश्वासन दिया।
इस पर ग्रामीणों ने साफ इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। मौके पर स्याना कोतवाली प्रभारी राकेश शर्मा भी फोर्स के साथ पहुंच गए। उन्होंने सख्ती से ग्रामीणों को हटवाने का प्रयास किया तो वह भड़क गए। इसके बाद स्याना कोतवाली प्रभारी नरम होकर ग्रामीणों के पक्ष में ही बात करने लगे। देर रात दोनों पक्षों में समझौता हो गया। समझौते के तहत जेई और एसडीओ पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये देंगे।
अमरदीप की ड्यूटी क्या थी और उससे क्या काम लिया जा रहा था, इसकी जांच कराई जाएगी। यदि अमरदीप से कुछ और ड्यूटी ली जा रही थी तो आरोपी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- राजेश सिंह, एसई
मृतक अमरदीप की ड्यूटी बिजलीघर पर संदेशवाहक की थी। संदेशवाहक का काम लाइन ठीक करना नहीं होता है। इसकी जांच होनी चाहिए। आरोपी अफसरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुरेन्द्र सिंह, सचिव, यूपी इम्प्लायज बिजली यूनियन
छह माह से नहीं मिला था वेतन
मृतक संविदाकर्मी अमरदीप को पिछले छह माह से वेतन तक नहीं मिला था। उसको मिलने वाला वेतन ठेकेदार ही डकार रहा था। संविदाकर्मी लाइन फॉल्ट ठीक करने के नाम पर आने वाले पैसों से ही अपना गुजारा चला रहा था। हालांकि ठेकेदार मेघ सिंह का कहना है कि संविदाकर्मी को दिसंबर तक का वेतन दे दिया गया था।
इकलौता सहारा था
अमरदीप अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसकी दो बहन थीं। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है, माता-पिता अक्सर बीमार रहते हैं। अमरदीप के कंधों पर ही घर के खर्च और माता- पिता की जिम्मेदारी थी। उसके मरने से उसके माता-पिता का इकलौता चिराग बुझ गया है। अब उनकी देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है।