बिल डिलीट घोटाला, असेस्मेंट घोटाला, आरएपीडीआरपी घोटाला के बाद पावर कारपोरेशन में एक और नया घोटाला सामने आया है। 50 करोड़ के पीएफ घोटाले का संज्ञान एमडी तक पहुंचने के बाद विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। अधीक्षण अभियंता ने पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।
पावर कारपोरेशन के 200 सरकारी कर्मचारियों और 700 संविदा कर्मचारियों का पीएफ पिछले कई सालों से डकारा जा रहा है। पावर कारपोरेशन के तीन डिवीजनों के सरकारी कर्मियों के पीएफ का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
एक सरकारी कर्मी का सालाना करीब 60 हजार और एक संविदाकर्मी का सालाना करीब 20 हजार रुपये पीएफ को व्यवस्थित तरीके से अफसर डकार रहे हैं। संविदाकर्मियों का पीएफ तो सीधे-सीधे खंड अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में जा रहा है, जबकि विभागीय कर्मियों का जीपीएफ कहां-कहां जा रहा है, यह जांच का विषय है।
पूरा मामला एमडी के संज्ञान में पहुंचने के बाद विभागीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। अधीक्षण अभियंता ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।