आधे घंटे तक दरिंदों से लड़ती रही बहादुर ‘बिटिया’
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एनएच-91 पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप के मामले में तेजी दिखाते हुए पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों सोमवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
पुलिस जल्द ही रिमांड पर लेकर तीनों से पूछताछ करेगी। हालांकि एक आरोपी रहीसुद्दीन उर्फ रईस के परिजनों ने पुलिस पर उसे फर्जी रूप से फंसाने का आरोप लगाते हुए पुलिस ऑफिस पर प्रदर्शन किया।
रविवार को पुलिस लाइन पहुंचे डीजीपी जावीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने खुलासा किया था कि वारदात को अंजाम देने में बबलू पुत्र रूपचंद निवासी फरीदाबाद, नरेश पुत्र अमर सिंह निवासी बठिंडा और रईस पुत्र सोहराब निवासी सुतारी शामिल हैं
लेकिन डीजीपी के वापस जाते ही पुलिस की लिस्ट बदल गई और रविवार रात दो आरोपियों के नाम हटाकर उनकी जगह दो अन्य नाम जोड़ दिए। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि वारदात में रहीसुद्दीन उर्फ रईस पुत्र सोहराब निवासी सुतारी थाना कोतवाली देहात,
साबिज पुत्र आस मोहम्मद निवासी आजरू दहपा थाना पिलखुवा (जिला हापुड़) और जबर सिंह पुत्र रामू निवासी नगला श्रीगोपाल थाना रबूपुरा (जिला गौतमबुद्धनगर) शामिल थे।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंद्र सिंह ने बताया कि सोमवार को पुलिस ने भारी पुलिस बल की सुरक्षा में तीनों आरोपियों रईस, साबिज और जबर सिंह को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या द्वितीय पॉस्को एक्ट में पेश किया।
न्यायाधीश ध्रुव कुमार तिवारी ने आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जल्द ही तीनों आरोपियों को रिमांड पर लिया जाएगा। गिरोह का सरगना समेत कई आरोपी अभी भागे हुए हैं।