सीएम अखिलेश यादव प्रदेश के अस्पतालों को हाईटेक करने में जुटे हैं। मरीजों के लिए करोड़ों रुपये की सौगात भेजकर स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटे हैं। सरकारी मशीनरी को उसके ही कर्मचारी नाकाम करने में जुटे हैं। इसकी बानगी खुर्जा स्थित जटिया सरकारी अस्पताल में देखने को मिल रही है। लैब चलाने वाले निजी संचालकों ने अपने गुर्गे सरकारी चिकित्सकों के कमरे में बैठा रखे है।
कमीशन के इस खेल में चिकित्सक-लैब संचालक बराबर के हिस्सेदार है। इसके अलावा दूर-दराज और शहर के मरीज भी चिकित्सकों की सेटिंग के चलते बाहर के मेडिकल स्टोरों से दवा लेने को मजबूर है। व्यवस्था पर भड़के एसडीएम ने तुंरत सीएमएस को फोन पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम ने बताया कि चिकित्सकों के कमरे में लैब संचालक के गुर्गे बैठने का मामला गंभीर है। इसके चलते चिकित्सकों की भूमिका शक के घेरे में है। सरकार लाखों रुपये की दवाएं देकर स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक करने में जुटी है। इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
नगर स्थित जटिया सरकारी अस्पताल में अस्पताल के ठीक सामने लैब चलाने वाले निजी लैब संचालक ने अपने गुर्गे सरकारी चिकित्सक के कमरे में छोड़ रखे है। सूत्रों की माने तो लैब संचालक के गुर्गे वहां मौजूद होने से चिकित्सक मरीजों को सीधे सामने वाली लैब के लिए रेफर कर देता है।
कमीशन के खेल में चिकित्सक-लैब संचालक बराबर के हिस्सेदार है। मामले के संज्ञान में आने पर एसडीएम खुर्जा राहुल यादव ने सीएमएस डा. रामवीर को फोन कर कार्रवाई के निर्देश दिए है। एसडीएम ने बताया कि इसके चलते सरकारी अस्पताल के चिकित्सक की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
यहीं नहीं अस्पताल में आने वाले अधिकतर मरीजों ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर बाहर के मेडिकल स्टोर संचालकों से सेटिंग होने के चलते मरीज को बुखार, चिकिनगुनिया, डेंगू और मलेरिया का भय दिखाते हुए जबरदस्ती बाहर की दवा को मंहगे दाम पर लेने को मजबूर करते है।