खिलाड़ी कोटे से भर्ती होने के बाद नेशनल स्तर के खिलाड़ी रहे सौरभ त्यागी को सामान्य सिपाहियों की तरह ड्यूटी करना उसे सहन नहीं हुआ। ट्रेनिंग के बाद आमद दर्ज कराते ही मनोज ने उसकी ड्यूटी क्वार्टर गार्ड पर लगा दी गई जिसका उसने विरोध भी किया। 21 अगस्त के बाद 22 अगस्त को भी ड्यूटी लगने के बाद गुस्से में आकर उसने यह कदम उठाया।
सोमवार रात आठ बजे दो घंटे की क्वार्टर गार्द ड्यूटी पर आने के थोड़ी देर तक सौरभ ने सही ड्यूटी की। कंधे पर लगी थ्री नॉट थ्री की राइफल को अचानक झरोखे से बाहर निकाल लिया। राइफल की नाल गणना कार्यालय के बाहर की ओर थी। करीब आठ बजकर 45 मिनट पर गणना मुंशी मनोज यादव अपने कार्यालय से बाहर निकला और सौरभ ने मनोज के ऊपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।
बता दें कि मनोज यादव ने ही सौरभ त्यागी की क्वार्टर गार्द पर ड्यूटी लगाई थी। लोगों का कहना है कि एचसीपी चंदरपाल और मनवीर यदि बीच में न आए होते तो उन्हें भी गोली नहीं लगती। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि सौरभ काफी समय से डिप्रेशन में जिंदगी गुजार रहा था। परिवार के लोगों से सौरभ के संबंध मधुर नहीं थे। शायद इसी वजह से सौरभ अवकाश में घर नहीं जाता था।
बाधा दौड़ में नेशनल चैंपियन था सौरभ
बुलंदशहर। सौरभ पांच बार नेशनल चैंपियनशिप में 400 मीटर की बाधा दौड़ में लोहा मनवा चुका था। उसका सपना ओलंपिक था। सोचा था पुलिस विभाग की सरपरस्ती में वह अपना सपना पूरा करेगा लेकिन भर्ती के साथ ही उसका प्रदर्शन खराब होने लगा। इससे वह डिप्रेशन में आ गया। यही वजह रही कि संतरी की डयूटी मिलने के बाद खुद को ठगा सा महसूस कर रहा था।
कक्षा छह में सौरभ का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण में हो गया था। प्राधिकरण के खर्च पर सौरभ को रायबरेली स्पोर्ट्स अकादमी में भेज दिया गया। सौरभ ने यहां सरकारी खर्च पर खेल की बारीकियों के साथ-साथ 12वीं तक पढ़ाई पूरी की। साल 2000-2001 में सौरभ का चयन पंजाब की पटियाला स्पोर्ट्स एकेडमी में हो गया।
बाद में सौरभ ने पांच बार नेशनल चैंपियनशिप में 400 मीटर की दौड़ में पदक जीते और मुजफ्फरनगर का नाम रोशन किया। वर्ष 2006 में स्पोर्ट्स कोटे से यूपी पुलिस में भर्ती हुआ था। स्पोर्ट्स कोटे का लाभ लेने के बाद सौरभ खेलों में कुछ खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया। इसलिए उसको 2008 में टर्मिनेट कर दिया गया। उसके साथ आठ खिलाड़ी टर्मिनेट किए गए थे। बाद में सौरभ समेत सभी को हाईकोर्ट ने बहाल कर दिया।