जेल में बंद विचाराधीन बंदी दीपक को बिन न्यायालय के तलबी आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के मामले में जेल अधीक्षक, उप कारापाल, बंदी रक्षक, बंदी राइटर दोषी पाए गए हैं। डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
बताया गया है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर जेल अफसर और कर्मचारियों को तबादला किया गया था। डीएम ने तबादले को नाकाफी बताते हुए लापरह अफसर और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की संस्तुति शासन से की है।
जिला कारागार में बंद दीपक पुत्र सुरेंद्र निवासी बिलसूरी को को बिना तलबी आदेश 18 मई को कोर्ट में पेश कर दिया गया था। डीएम की जांच में सामने आया है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के ऊपर सूची में दीपक का नाम डाल दिया गया था।
जिसे डीएम ने बेहद आपत्तिजनक माना है। जांच के दौरान डीएम ने जेल अधीक्षक से जवाब-तलब किया था। जेल अधीक्षक ने खुद स्वीकार कर लिया था कि बंदी गृह से बिन तलबी के दीपक कोर्ट में पेश हुआ।
डीएम ने शासन को रिपोर्ट में लिखकर भेजा है कि बंदी राइटर, बंदी रक्षक समेत जेल अफसरों को सिर्फ हटा देना पर्याप्त नहीं है। कुल मिलाकर रिपोर्ट के सारांश की बात करें तो जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला, उप कारापाल रंजनी कुमार गुप्ता, बंदी रक्षक संदीप चौधरी, बंदी राइटर कन्हैया पूर्ण रूप से दोषी बताए गए हैं।
डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज लापरवाह जेल अफसर और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की है।
प्रकरण की जांच शासन स्तर से सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन स्तर से आरोपी जेल अफसर और कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। जेल में इस प्रकार की मनमानी नहीं चलेगी। जांच में जेल अफसर और कर्मचारियों की घोर लापरवाही सामने आई थी।- शुभ्रा सक्सेना, डीएम