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फरार बंदियों की तलाश में रातभर पड़े छापे

Sat, 24 Sep 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
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बंदी राजेश को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते पुलिसकर्मी। - फोटो : ब्यूरो
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एसीजेएम कोर्ट में पेशी के बाद सिपाहियों की आंखों में मिर्च झोंककर भागे पांच बंदियों का 24 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं लग सका। पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों पर रातभर दबिश दी लेकिन कोई हाथ नहीं आया। वहीं मौके से भागते हुए दबोचे गए बंदी राजेश उर्फ जंगलिया से शनिवार को घंटों पूछताछ की गई।
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दोपहर बाद एसीजेएम कोर्ट में पेश करने पर जज ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने की धारा बढ़वाई और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मालूम रहे कि शुक्रवार दोपहर एसीजेएम कोर्ट में पेशी पर लाए गए पांच बंदी पुलिसकर्मियों की आंख में मिर्च झोंककर फरार हो गए थे।

मौके पर भागते छठे बंदी राजेश उफ जंगलिया को पुलिसकर्मियों ने दबोच लिया था।  शनिवार सुबह एसपी देहात ने टीम के साथ राजेश उर्फ जंगलियां से कई घंटे पूछताछ की। शनिवार दोपहर राजेश उर्फ जंगलिया को हिरासत से भागने के आरोप में एसीजेएम मोहम्मद आजाद के न्यायालय में पेश किया गया।
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न्यायाधीश ने राजेश उर्फ जंगलिया को सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोपी माना और दर्ज एफआईआर में आईपीसी की धारा-353 का इजाफा किया। न्यायाधीश ने राजेश उर्फ जंगलिया को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। 

वहीं दूसरी ओर पुलिस टीमें रातभर फरार बंदियों राजेश पुत्र धर्मवीर, रूपेंद्र उर्फ पैना पुत्र मंगलसेन, अजय पुत्र शेर सिंह, टीटू उर्फ किरनपाल पुत्र रेशमपाल और रवि उर्फ रविंद्र पुत्र महेंद्र सिंह के संभावित ठिकानों पर छापेमारी करती रहीं। उनकी तलाश में क्राइम ब्रांच की टीम भी जुटी है। साथ ही पुलिस सर्विलांस की मदद भी ले रही है।

क्या जेल की कैंटीन से लाए थे मिर्च पाउडर
कस्टडी से फरार होने के मामले की जांच में जुटी पुलिस सबसे पहले यह पता लगाने में जुटी है कि बंदियों को मिर्च पाउडर कहां से मिला?  सूत्रों की मानें तो फरार हुए बंदी जेल की कैंटीन से मोटी रकम देकर मिर्च पाउडर लाए थे। हालांकि आला अफसर इस मामले में अभी कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सभी बंदी जिला कारागार से वैन के जरिए सीधे अनूपशहर कोर्ट लाए गए थे। वहां हवालात में रखे जाने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। फिर चार घंटे तक हवालात में रखा गया। इसके बाद वैन में चढ़ते समय बंदियों ने पुलिसकर्मियों की आंख में मिर्च पाउडर झोंक दिया।

पुलिस का मानना है कि बंदियों के हाथ मिर्च पाउडर या तो वे जेल से इसे लाए हों या फिर हवालात से पेशी के लिए ले जाए जाते वक्त और वापसी में हवालात में डाले जाते वक्त उन्हें किसी ने मिर्च पाउडर से भरा पाउच थमाया हो।

फरार बंदियों ने जेल में ही बना लिया था नया गैंग
पेशी के दौरान फरार हुए बंदियों ने जेल में ही भागने की प्लानिंग बना ली थी। ये लोग पिछले एक माह से पुलिस हिरासत से भागने की योजना बना रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, ये लोग भले ही अलग-अलग मामलों में जेल में बंद थे लेकिन इन लोगों की जेल में रहते हुए आपस में दोस्ती हो गई थी और इन्होंने अपना नया गैंग बना लिया था।

फरार हुआ रूपेंद्र 26 नवंबर 2013 से जेल में बंद था। टीटू उर्फ किरनपाल 16 दिसंबर 2015 से जेल में बंद था। अजय 29 फरवरी 2016 को जेल आया था। राजेश 18 जून 2016 को जेल गया था। वहीं रवि उर्फ रविंद्र 26 जून 2016 को जेल गया था। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ लोग जेल की एक ही बैरक में बंद थे जबकि कुछ दूसरी बैरकों में बंद थे।

अलग-अलग मामलों में बंद होने के बावजूद इन लोगों की जेल में दोस्ती हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, छह आरोपियों ने जेल में ही अपना नया गैंग बना लिया था। अब पुलिस यह जानने में जुटी है कि इस गैंग का सरगना कौन है और ये लोग किस बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए फरार हुए हैं।

कौन है मददगार
पुलिस को आशंका है कि बंदियों को भगाने में कुछ और लोगों का भी हाथ हो सकता है। शुक्रवार दोपहर जिस तरह बंदी फरार हुए, इससे आशंका जताई जा रही है कि उन्हें ले जाने के लिए कुछ लोग पहले से तैयार थे। जांच में जुटी पुलिस का मानना है कि एक तरफ गंगा होने के चलते बंदी इतनी दूर पैदल नहीं भाग सकते।

हालांकि पुलिस को गंगा की खादर में जूते भी मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि बंदियों को लेने के लिए गंगा में कोई नाव खड़ी थी। फरार बंदी पहासू, छतारी, अहार और रामघाट क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्हें अनूपशहर क्षेत्र की पूरी भौगोलिक जानकारी है। इससे उन्हें भागने में मदद मिली होगी।
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