एक महिला सिपाही का कैरियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। इसको अपने ही विभाग के कर्मियों को घूस नहीं देने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ा। घूस नहीं मिलने पर एलआईयू ने उसकी करेक्टर रिपोर्ट नहीं लगाई, जिसके कारण वह नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाई।
मामला संज्ञान में आते ही एसएसपी ने एसपी देहात को मामले की जांच के निर्देश देते हुए सात दिन में रिपोर्ट तलब की है। अहार थानाक्षेत्र के गांव खनौदा निवासी यशपाल सिंह की बेटी रूबी ने पुलिस भर्ती का एग्जाम दिया था। इसमें रुबी का चयन भी हो गया था। बाद में शासन ने एग्जाम में व्हाइटनर का प्रयोग करने वाले चयनित अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया था।
इसके बाद यह अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने शासन का आदेश निरस्त करते हुए इन्हें तैनाती देने के निर्देश दिए। शासन की तरफ से भी ज्वाइन करने के लिए आदेश जारी कर दिए गए। सभी चयनित अभ्यर्थियों के फार्म क्षेत्रीय थानों में भरवाए गए। थाने से जांच के लिए एलआईयू को रिपोर्ट भेज दी गई।
आरोप है कि एलआईयू में तैनात एक एचसीपी ने रुबी से रिपोर्ट लगाने के लिए 1000 रुपये की घूस ली। इसके बाद रूबी से और रुपये मांगे जा रहे थे। रुपये नहीं देने पर रुबी की रिपोर्ट नहीं लगाई गई। इसके कारण ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि निकल गई। इससे रुबी ज्वाइन नहीं कर सकी।
नौकरी हाथ से निकल जाने पर रुबी ने पूरे मामले की शिकायत एसएसपी से की। रुबी ने रोकर एसएसपी को पूरे मामले से अवगत कराया। इस पर एसएसपी ने रुबी को ज्वाइन कराने का आश्वासन देते हुए एसपी देहात को मामले की जांच के निर्देश दिए। एसएसपी ने सात दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
एलआईयू में करप्शन का बोलबाला है। यह मामला तो एक बानगी भर है। एलआईयू में बिना रिश्वत कोई रिपोर्ट नहीं भेजी जाती है। रिपोर्ट भेजनेे के नाम पर जमकर वसूली की जाती है। अफसर भी एलआईयू कर्मियों पर मेहरबान नजर आते हैं।