बीएसएनएल में घूसकांड के बाद बीएसएनएल के जीएम रामविलास वर्मा ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेस कर अपनी सफाई दी। उन्होंने बताया कि ब्लैक लिस्टेड होने से बचने के लिए ठेकेदार कई दिनों से चक्रव्यूह रच रहा था।
हालांकि रिश्वत लेने में डीजीएम की गिरफ्तारी के सवार पर वे चुप्पी साध गए। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि डीजीएम ने घूस क्यों ली? इस बारे में डीजीएम ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं।
बुधवार को भूड़ स्थित बीएसएनएल कार्यालय में जीएम रामविलास वर्मा ने पत्रकारों को बताया कि जनपद के 15 ब्लॉक के 857 गांवों को नेशनल ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क (नोफन) से जोड़ने के लिए काम चल रहा है।
मार्च 2016 में हुई ई-टेंडर में ठेकेदार पवन कुमार बालियान को सिकंदराबाद में 15 फीसदी, गुलावठी में 30 फीसदी, दानपुर में 30 फीसदी और अनूपशहर में 30 फीसदी काम दिया गया। इस काम के बदले करीब 90 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
इसके बाद तीन माह पहले हुई ई-टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदार को लखावटी में 30 फीसदी, शिकारपुर में 40 फीसदी, बीबीनगर में 40 फीसदी और जहांगीराबाद ब्लॉक में 40 फीसदी काम दिया गया। ठेकेदार को करीब 250 किमी नेटवर्किंग लाइन बिछाने का काम मिला, जिसके सापेक्ष महज 150 किमी नेटवर्किंग लाइन ही बिछाई गई। बाकी 100 किमी नेटवर्किंग का काम 31 दिसंबर तक पूरा करना था, जिसे कर पाना ठेकेदार के लिए नामुमकिन था।
ठेकेदार को पूर्व में ही नोटिस जारी किया जा चुका है। उसके खिलाफ ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। इसी कार्रवाई से बचने के लिए ठेकेदार पिछले कई दिनों से चक्रव्यूह रच रहा था, जिसमें डीजीएफ फंस गए।