एक वरिष्ठ अधिवक्ता पर साढ़े चार साल पहले हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस का नया खेल सामने आया है। अज्ञात में दर्ज केस की जांच कर रहे विवेचक ने पहले पांच लोगों को हमलावर होने का दावा करते हुए आरोपी बनाया।
बाद में उसी विवेचक ने आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए गुप-चुप तरीके से फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पीड़ित की शिकायत पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी को तलब किया है।
डीएम कॉलोनी में रहने वाले अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने बताया कि उनके पिता महावीर सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। 27 अक्टूबर 2011 की शाम 7 बजकर 55 मिनट पर वह कॉलोनी में घूम रहे थे। तभी कुछ लोग आए और उन्होंने रंजिशन उनके सीने में गोली मार दी।
गंभीर हालत में नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से कुछ दिन उपचार के बाद छुट्टी दे दी। प्रदीप सिंह ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआईआर क्राइम नंबर (821/11) दर्ज कराई। केस की विवेचना हुई। पुलिस की ओर से पूरे केस में 45 पर्चे काटे गए।
पर्चों में पांच आरोपियों के नाम सामने आए। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 16 फरवरी 2013 को जांच अधिकारी पीआर शर्मा ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने बताया कि घायलावस्था में उनके पिता ने कुछ आरोपियों के नाम पुलिस को बताए थे।
लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद पीड़ित अधिवक्ता ने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को तलब किया है। जांच अधिकारी इस समय नोएडा क्राइम ब्रांच में तैनात है।