स्कूल निर्माण का फर्जी बिल बनाकर 5.40 लाख का घोटाला
- सूचना के अधिकार के तहत हुआ खुलासा, अब जांच में कुंडली मार बैठे अफसर
- मामला उजागर होने पर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक ने लिया कड़ा संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल निर्माण में फर्जी बिल बनाकर 5.40 लाख के घोटाले करने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी से हुआ। अब अफसर जांच पर कुंडली मारे बैठे हैं। मामला उजागर होने पर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक ने कड़ा संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
खुर्जा क्षेत्र के गांव सनैता सफीपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में निर्माण करवाने के लिए सीमेंट, रोड़ी-बदरपुर, लोहा, ईंट व बिजली के सामान आदि के खरीद के लिए फर्जी बिल बाउचर तैयार कर लिए थे। यह बिल 5.40 लाख के बनाए गए और विभागीय अफसरों ने पास भी कर दिए। जबकि सच्चाई यह है कि इस स्कूल में कोई भी निर्माण कार्य नहीं हुआ। यह सब कुछ तत्कालीन बीएसए वेदराम के कार्यकाल में हुआ। इस घोटाले का पता जब गौतमबुद्धनगर स्थित सिविल कोर्ट सूरजपुर ग्रेटर नोएडा के वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता वीके वर्मा को चला तो उन्होंने 14 अक्तूबर 2016 को बेसिक शिक्षा विभाग से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। यह जानकारी तत्कालीन बीएसए धर्मेंद्र सक्सेना से मांगी गई थी। पहले तो विभाग ने जानकारी देने में आनाकानी की। मगर, बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप पर जब जानकारी दी गई तो उसमें फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। इसमें एक अध्यापक और ग्राम प्रधान की मिलीभगत पाई गई। इससे विभाग में हड़कंप मच गया और जांच भी की गई तो स्कूल निर्माण में घोटाले में शामिल दोषियाें के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश हुए। इसे अफसरों ने दबाने का भी प्रयास किया था। मगर, वीके वर्मा लगातार प्रयासरत रहे और अब फिर अफसर इसमें कोताही बरत रहे हैं और डीएम के आदेश पर भी आज तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर तो दूर की बात कार्रवाई तक नहीं हुई है। वीके वर्मा ने इससे मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक अशोक कुमार सिंह को शिकायत देकर अवगत करवाया तो उन्हें अब बीएसए को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उधर, बीएसए अजीत कुमार का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।