सरकारों के तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद अभी बेटा-बेटी के बीच का फासला कम नहीं हो पा रहा है। बेटी को बोझ समझने वालों की समाज में अभी भी कोई कमी नहीं है।
बेटी होने पर उसके मां-बाप उसे अस्पताल में ही छोड़कर फरार हो गए। अस्पताल ने उसके परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने भी नवजात को अपनाने से इनकार कर दिया।
जहांगीराबाद के खाकरोबान निवासी सुमन पत्नी मनोज कुमार के गत 20 मार्च को नगर के भूड़ स्थित सेवा नर्सिंग होम में एक बेटी पैदा हुई।
बेटी प्रीमैच्योर पैदा होने के कारण उसे नर्सिंग होम से डीएम रोड स्थित होली चाइल्ड हेल्थ केयर को रेफर कर दिया गया। मां-बाप ने उसे अस्पताल की नर्सरी में भर्ती कर दिया। इसके बाद दंपति अस्पताल में दो दिन तक रुके और तीसरे दिन बिना किसी को बताए वहां से चले गए।
अस्पताल संचालक ने कुछ दिन तक मां-बाप के लौटने का इंतजार किया, लेकिन जब वह 1 अप्रैल तक नहीं आए तो अस्पताल में दर्ज कराए गए पते पर संपर्क किया। बाद में अस्पताल कर्मी उस पते पर पहुंचे और पूरी कहानी बताई।
अस्पताल संचालक ने बताया कि वहां मिले एक व्यक्ति ने खुद को मनोज का पिता बताया। बच्ची के दादा ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया और मनोज को भी बेदखल किए जाने का दावा किया। इसके बाद अस्पताल संचालक ने नवजात को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है।